भोपाल। MP में लोकसभा के लिए चार चरणों में मतदान हो चुका है और अभी नतीजे आने शेष हैं, मगर विधानसभा के उपचुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चली है। इसकी वजह यह है कि कांग्रेस के तीन विधायकों ने भाजपा का दामन थामा है, वहीं पांच विधायकों को लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारा गया है। इसी तरह छतीसगढ़ में भी बीजेपी-कांग्रेस के 4 MLA लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

3 MLA ने छोड़ी कांग्रेस

मध्य प्रदेश में आगामी समय में तीन से आठ विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना तय है। यह इसलिए संभव है क्योंकि कांग्रेस के तीन विधायक, छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा से कमलेश शाह, सागर जिले के बीना विधानसभा क्षेत्र से निर्मला सप्रे और श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट से रामनिवास रावत ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इस तरह आगामी समय में इन तीनों सीटों पर उपचुनाव होना तय है।

मध्यप्रदेश में इसके अलावा भाजपा तथा कांग्रेस ने पांच विधायकों को लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है।

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एमपी में लोकसभा की 29 सीटें हैं, जहां चार चरणों में मतदान हो चुका है और चुनावी नतीजे चार जून को आएंगे। पांच स्थानों पर वर्तमान विधायक चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने बुधनी से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विदिशा से उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को सतना संसदीय क्षेत्र, डिंडोरी से विधायक ओमकार सिंह मरकाम को मंडला संसदीय क्षेत्र से, पुष्पराजगढ़ से विधायक फुन्देलाल मार्को को शहडोल से और तराना से विधायक महेश परमार को उज्जैन संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है।

इस तरह राज्य में तीन विधायकों के पाला बदलने से उपचुनाव तय है तो वहीं जो पांच विधायक लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं उनकी जीत और हार के आधार पर अन्य स्थानों पर भी उपचुनाव संभाव है। इसी संभावना ने कई दावेदारों को अभी से उपचुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए सक्रिय कर दिया है।

भाजपा और कांग्रेस के भीतर भी विधानसभा के उप चुनाव को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। संभावना इस बात की जताई जा रही है कि भाजपा उन तीन स्थानों से कांग्रेस से आए विधायकों को ही उम्मीदवार बनाएगी, तो वहीं कांग्रेस नए चेहरों पर दाव लगा सकती है। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद दोनों ही दल नए सिरे से उम्मीदवार की खोज में जुट जाएंगे।

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इसी तरह छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री और विधायक बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल के अलावा MLA देवेंद्र यादव और कवासी लखमा लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। हार-जीत के नतीजे के बाद जो भी सीट खाली होगी वहां उपचुनाव होना तय है। फ़िलहाल यह चर्चा सरगर्म है कि सीटें खाली होने के बाद किस नेता के चुनाव लड़ने की संभावना प्रबल होगी।