ढाका/नई दिल्ली। आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसा में तब्दील हो चुका है। पड़ोसी देश बांग्लादेश हिंसा की आग में जल रहा है। बिगड़े हालातों के बीच शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। वह सेना के हेलीकॉप्टर में बैठकर भारत पहुंच गई हैं। उनके साथ में उनकी बहन भी हैं। शेख हसीना जिस विमान से निकली थीं, वह गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर लैंड हुआ।

पीएम आवास पर लोगों का कब्ज़ा

इससे पहले बांग्लादेश से आई तस्वीरों में पता चला कि ढाका में प्रधानमंत्री के आवास पर भीड़ ने कब्जा कर लिया। इसके बाद देश के सेना चीफ वकर-उज-जमान ने राष्ट्र को संबोधित और कहा कि अंतरिम सरकार देश को चलाएगी। उन्होंने कहा कि वो देश में शांति वापस लाएंगे। उन्होंने अपने देश के नागरिकों से हिंसा रोकने का आग्रह भी किया। रविवार को बांग्लादेश में सड़कों पर हुई हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 300 लोगों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आज लगाए गए कर्फ्यू का पालन नहीं करते हुए ढाका तक लंबा मार्च बुलाया था।

बांग्लादेश में बवाल कैसे शुरू हुआ?

बांग्लादेश में प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए और तब से अब तक इस बवाल में करीब 300 लोग मारे जा चुके हैं। शुरुआत में ये प्रोटेस्ट सिविस सेवा में कोटा के खिलाफ शुरू हुआथा लेकिन बाद में इसने सरकार विरोधी रूप ले लिया और प्रदर्शनकारी पीएम शेख हसीना के इस्तीफे की मांग करने लगे।

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बांग्लादेश में प्रदर्शन के बीच 15 जुलाई को झड़पें शुरू हो गईं, जिसके बाद सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज और सेकेंडरी स्कूल अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिए गए। 16 जुलाई को और भी भयंकर झड़पें हुईं और इसके बाद शेख हसीना ने बांग्लादेश को संबोधित किया और हत्याओं की न्यायिक जांच की घोषणा की। हालांकि इसके बाद भी हिंसा कम नहीं हुई। बांग्लादेशी सरकार ने 20 जुलाई को राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू लगा दिया और सेना को तैनात कर दिया।

इसके बाद 23 जुलाई को सरकार की तरफ से एक सर्कुलर जारी कर कहा गया कि कोटा सिस्टम में बदलाव किए जाएंगे लेकिन प्रदर्शनकारी इस पर राजी नहीं हुए। इसके बाद सरकार ने रेड तेज कर दीं और गिरफ्तारियां की जानें लगी। इसी दौरान यूएन की तरफ से बांग्लादेश सरकार से कहा गया कि वो प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार न करे और इंटरनेट सेवाओं को बहाल करे। 29 जुलाई के बाद से प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध और तेज कर दिया।

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बांग्लादेश में अब क्या हो रहा?

बांग्लादेश में रविवार को बहुत जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। इस दौरान जमकर हिंसा भी हुई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सरकार विरोधियों के बीच जमकर झड़पें हुईं। सोमवार को कुछ प्रदर्शनकारी ढाका स्थित पीएम आवास में घुस गए। सोमवार को शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उन्होंने राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की और उन्हें बताया कि सेना कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगी। देश भर में विरोध प्रदर्शनों के बीच जनरल ने कहा कि उन्होंने सेना और पुलिस दोनों से गोली न चलाने को कहा है।

शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद क्या हुआ?

बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां द्वारा प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए। बांग्लादेश से आई तस्वीरों में प्रदर्शनकारी पीएम के सरकारी आवास के अंदर नजर आए। हालांकि उस समय शेख हसीना वहां से निकल चुकी थीं। तस्वीरों में प्रदर्शनकारी पीएम के आधिकारिक आवास ‘गणभवन’ में तोड़फोड़ और लूटपाट करते हुए दिखाया गया है।

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भवनों में तोड़फोड़ और आगजनी

प्रदर्शनकारियों में से कई लोग गणभवन का सामान लेकर जाते भी नजर आए औऱ कुछ शेख हसीना के पिता एवं 1971 के मुक्ति संग्राम के नायक शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमा पर चढ़ते और हथौड़ों से उसे तोड़ते हुए नजर आए। धानमंडी और ढाका में हसीना की पार्टी अवामी लीग के कार्यालय को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए। उन्होंने राजधानी में गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के आवास पर भी हमला किया और तोड़फोड़ की। उनके घर से धुआं निकलता भी देखा गया।

प्रोफेसर आसिफ नजरुल ने क्या कहा?

ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आसिफ नजरुल ने शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद लोगों और छात्रों से धैर्य व अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने सोमवार को अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, “हम अभी सेना प्रमुख के साथ चर्चा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने हमारे छात्रों और लोगों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को समझ लिया है।”