भोपाल | हर वर्ष 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजन के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण के प्रति समाज को जागरूक करना है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हर व्यक्ति, चाहे वह शारीरिक या मानसिक रूप से सक्षम हो या नहीं, समाज का अभिन्न हिस्सा है। इस अवसर पर हम न केवल उनकी उपलब्धियों का सम्मान करते हैं, बल्कि उनके सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने और उनके लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने दिव्यांगजन के सशक्तिकरण के लिए कई प्रभावी योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं, जो उनकी कार्यक्षमता और जीवन-स्तर को बेहतर बनाने के लिए समर्पित हैं।

मध्यप्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करने वाला अग्रणी राज्य है। वर्ष 2011 की जनगणना में 15 लाख 51 हजार से अधिक दिव्यांगजन का चिन्हांकन किया गया था, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुसार दिव्यांगजन की 21 श्रेणियों को इसमें सम्मिलित किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि दिव्यांगजन में प्रतिभा की कमी नहीं होती है, जरूरत उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने की है। हम लगातार देख रहे देश-प्रदेश के दिव्यांग भाइयों द्वारा हर क्षेत्र में अपनी सशक्त भागीदारी दर्ज कराई है।

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मध्यप्रदेश के परिक्षेत्र में हम देखें तो पायेंगे कि इस वर्ग के लोगों को यूनिक आईडी कार्ड बनाने का कार्य संवेदनशीलता के साथ किया जा रहा। भारत सरकार ने इस वर्ष 2023-24 में 6.60 लाख कार्ड बनाने का लक्ष्य दिया था। प्रदेश 8 लाख 85 हजार कार्ड तैयार कर देश में द्वितीय स्थान पर है। इसी प्रकार सुगम्य भारत अभियान के तहत प्रदेश के दिव्यांगजन को शासकीय कार्यालयों में आने जाने में कठिनाई का सामना न करना पड़े इसके लिए सुगम्य भारत अभियान को बाधा रहित वातावरण निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 2023 का सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

दिव्यांगजन के सशक्तिकरण के उद्देश्य

1. दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाना।

2. समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

3. दिव्यांगजन को रोजगार, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं में समान अवसर प्रदान करना।

मध्यप्रदेश में दिव्यांगजन को मुख्यधारा से जोड़ने के लिये अनेक अभियान एक साथ चलाए जा रहे है। इनमें प्रमुख हैं:-

एडीआईपी योजना

केन्द्र सरकार की एलिम्को संस्था के माध्यम से संचालित एडिप योजना के तहत राज्य में वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 37,224 दिव्यांगजन को 49.26 करोड़ रुपये मूल्य के सहायक उपकरण वितरित किए गए।

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वर्ष 2024-25 में 14 जिलों में उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें 3,228 हितग्राहियों को 546.85 लाख रुपये मूल्य के कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

निःशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना

इस योजना के तहत पात्र दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यदि एक साथी दिव्यांग है तो 2 लाख और यदि दोनों दिव्यांग हैं तो 1 लाख की सहायता दी जाती है। इस योजना से वर्ष 2023-24 में 122 और 2024-25 (अगस्त तक) में 1,200 दंपत्तियों को लाभान्वित किया गया। योजना शुरू होने से अब तक 17,095 दंपत्तियों को सहायता मिली है।

मुख्यमंत्री निःशक्त शिक्षा प्रोत्साहन योजना

दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना लागू की गई है। योजना के तहत, छात्रों को लेपटॉप और बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी जाती है। वर्ष 2024-25 में 70 छात्रों और 2023-24 में 537 छात्रों को लाभ मिला है। इस, दिव्यांग दिवस पर पात्र छात्रों को ये उपकरण वितरित किए जाएंगे।

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समावेशी समाज की दिशा में कदम

दिव्यांगजन के लिए सहायक उपकरण जैसे कृत्रिम अंग, बैसाखी, श्रवण यंत्र, और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उनकी दैनिक जीवन की चुनौतियों को कम करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही, यूडीआईडी कार्ड उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सक्षम बनाता है।

सामाजिक जागरूकता और सहभागिता

विश्व दिव्यांग दिवस केवल योजनाओं और सहायता तक सीमित नहीं है, यह समाज को यह समझाने का अवसर भी है कि दिव्यांगता कोई कमी नहीं, बल्कि एक विशेषता है। हमें उनकी क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

निष्कर्ष

दिव्यांगजन का सशक्तिकरण केवल राज्य सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब हम समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हैं, तब हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकते हैं जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।

इस विश्व दिव्यांग दिवस पर, आइए हम दिव्यांगजन को सशक्त बनाने की दिशा में अपने प्रयासों को और मजबूत करें और उनके योगदान को स्वीकार कर उनके साथ एक नए समावेशी और सक्षम समाज की ओर कदम बढ़ाएं।