रायपुर। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) में हाल ही में हुई भर्तियों पर सवाल उठने के बाद सीएम सचिवालय ने सीईओ, चिप्स से पूरे मामले में जानकारी मांगी है। इसके बाद चिप्स में अफरा-तफरी मची हुई है। अब भर्तियों में हुई गड़बड़ियों को दुरुस्त करने के लिए अवकाश के दिन शनिवार को चिप्स के आला अफसर दस्तावेज सुधारने और जवाब तैयार करने में जुटे रहे।

बर्खास्त कर्मियों की पुनर्नियुक्ति की फाइल भी तलब

बताया जा रहा है कि चिप्स में NISG/KPMG के पे रोल पर भर्ती किए गए पूर्व में बर्खास्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति की फाइल भी मुख्यमंत्री कार्यालय ने तलब की है, क्योंकि इन भर्तियों के लिए कोई भी अनुमोदन फाइल पर नहीं लिए गए बल्कि सीधा एनआईएसजी एवं अन्य को सीईओ चिप्स की तरफ से पत्र जारी कर दिया गया। जिन्हें दोबारा नियुक्ति दी गई वे सभी भारत नेट प्रोजेक्ट में पेमेंट को लेकर हुई गड़बड़ी के दौरान भी रहे हैं।

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सबसे गंभीर बात यह है कि एनआईएसजी इन भर्तियों के एवज में लाखों रुपए के सालाना वेतन में हर माह 15 प्रतिशत कमीशन भी लेगी। यह चिप्स के राजस्व की बर्बादी है।

चिप्स में हुई गड़बड़ी में रही है भूमिका

पता चला है कि जिन्हे दोबारा नियुक्ति दी गई वे सभी लोग 2018 में भारत नेट प्रोजेक्ट में टाटा प्रोजेक्ट को 196 करोड़ रुपए एडवांस देने में की गई जल्दबाजी गड़बड़ी के वक्त भी पदस्थ रहे हैं। बताया गया है कि पेमेंट के बाद इनके द्वारा टाटा प्रोजेक्ट से एडवांस रिसीव्ड वाउचर नहीं लिए गए थे। इससे जीएसटी का सेटलमेंट नहीं हो पाया और राज्य सरकार को 77 करोड़ के जीएसटी का अतिरिक्त भार के साथ ब्याज भी बढ़कर 12 करोड़ के लगभग हो गया। इसका भुगतान बाद में तत्कालीन सीईओ समीर विश्नोई, जो अभी जेल में हैं, उनके द्वारा भारत नेट के केपेक्स मद से किया गया। लेकिन ARV न लेने के कारण वो 77 करोड़ रुपए चिप्स को वापस नहीं मिल सकते और भारत सरकार जब प्रोजेक्ट का ऑडिट करके फाइनल सेटलमेंट करेगी तो वो जीएसटी का भुगतान किए गए 77 करोड़ रुपए को भी शामिल करेगी और इसकी भरपाई अब राज्य सरकार को करनी होगी।

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जिम्मेदारों से वसूली का है प्रस्ताव

राज्य संपरीक्षा की ऑडिट टीम ने अंकेक्षण के दौरान इस कमी को पकड़ा और अपनी रिपोर्ट की कंडिका 5,6,7 में भी लिखा है कि उस समय 2018 के अधिकारी एवं कर्मचारियों से इसकी वसूली वांछनीय है और इस पर तत्समय के अधिकारी प्रोजेक्ट मैनेजर , फाइनेंस मैनेजर समेत आधा दर्जन लोगों के नोटशीट के पेज 3 एवं 5 पर हस्ताक्षर भी किए हैं।

फिलहाल यह सारा मामला चिप्स में बिना अनुमोदन के नियुक्तियों से जुड़ा हुआ है और अफसर इसमें लीपापोती में लगे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि शनिवार को आफिस में लगे सीसीटीवी के फुटेज निकाल कर इनके कार्यालय में होने की पुष्टि की जा सकती है।