टीआरपी डेस्क। हरियाणा में यमुना नदी के पानी में जहर मिलाने संबंधी बयान को लेकर दायर याचिका की दूसरी सुनवाई में भी दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनकी ओर से उनके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल किया।

पहली सुनवाई में भी नहीं हुए थे पेश

इस मामले में पहली सुनवाई 17 फरवरी को हुई थी, लेकिन उस वक्त भी केजरीवाल कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। उस दौरान आम आदमी पार्टी की लीगल सेल के प्रमुख एवं बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के उपाध्यक्ष संजीव नासियार उनकी ओर से पेश हुए थे।

संजीव नासियार ने कोर्ट में तर्क दिया था कि नोटिस के साथ उन्हें मामले से जुड़े पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। इसके बाद उन्हें वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेजों के साथ सबूत सौंपे गए। अब केजरीवाल की लीगल टीम ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल कर दिया है।

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क्या था केजरीवाल का बयान?

यह मामला तब सामने आया जब राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से राई जल सेवा प्रभाग के कार्यकारी अभियंता आशीष कौशिक ने सोनीपत की अदालत में याचिका दायर की।

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि 28 जनवरी को यमुना नदी से सटे गांवों के लोग सिंचाई विभाग परिसर में एकत्रित हुए और हरियाणा सरकार पर यमुना के पानी में जहर मिलाने का आरोप लगाया।

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें यह जानकारी कहां से मिली, तो कुछ ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो दिखाया। इस वीडियो में अरविंद केजरीवाल यह कहते नजर आ रहे थे कि हरियाणा सरकार ने यमुना के पानी में जहर मिला दिया है।

सरकारी वकील का बयान

हरियाणा सरकार की ओर से केस की पैरवी कर रहे सरकारी अधिवक्ता भुवेश मलिक ने बताया कि राज्य सरकार ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

पहली सुनवाई में बचाव पक्ष ने कहा था कि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर केजरीवाल का वीडियो, प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज मुहैया कराए गए थे।

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अब बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया है, जिसके आधार पर अगली सुनवाई 31 मई को होगी। बचाव पक्ष के जवाब के आधार पर अभियोजन पक्ष अब आगे की कानूनी रणनीति तय करेगा।