टीआरपी डेस्क । चैत्र नवरात्रि का छठा दिन देवी कात्यायनी की आराधना को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माता का प्राकट्य महर्षि कात्यायन के घर हुआ था, इसी कारण उन्हें ‘कात्यायनी’ नाम से जाना जाता है। इस वर्ष नवरात्रि की षष्ठी तिथि 3 अप्रैल 2025, गुरुवार को पड़ रही है।

शुभ मुहूर्त

मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 07:02 बजे से प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा। विशेष रूप से, ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना अधिक फलदायी माना जाता है, जो सुबह 04:37 से 05:23 तक रहेगा।

पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें।
  • मां कात्यायनी का ध्यान कर, उन्हें अक्षत, कुमकुम, पुष्प और सोलह श्रृंगार अर्पित करें।
  • जल अर्पित कर दुर्गा चालीसा एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • माता को शहद या हलवे का भोग अर्पित करें।

मां कात्यायनी का प्रिय भोग

मान्यता है कि मां कात्यायनी को शहद या हलवा अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

देवी कात्यायनी की आरती

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥