रायपुर। छत्तीसगढ़ के 2621 बीएड डिग्रीधारी सहायक शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने सेवा से बाहर किए गए इन शिक्षकों को अब सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला) के पद पर समायोजित करने का निर्णय लिया है। यह अहम फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। इस फैसले के पीछे बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल की भूमिका भी अहम रही, जिन्होंने इन शिक्षकों के पक्ष में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर समायोजन की सिफारिश की थी।

इस फैसले से न केवल हजारों शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षा मिली है, बल्कि राज्य के स्कूलों में विज्ञान की प्रयोगात्मक शिक्षा को भी बल मिलेगा। लंबे समय से समायोजन की मांग कर रहे इन शिक्षकों और उनके परिवारों में इस निर्णय के बाद उत्साह और संतोष का माहौल है।

बता दें बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर बीएड शिक्षकों को समकक्ष पदों जैसे प्रयोगशाला सहायक और व्यायाम शिक्षक पर समायोजित करने की सिफारिश की थी।

जानें क्या है मामला?

सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त 2023 को आदेश दिया था कि B.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां केवल 11 अगस्त 2023 से पहले तक ही मान्य होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना के लिए D.Ed अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की शरण ली और B.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां खारिज करने की मांग की. इस पर B.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने भी याचिका लगाई. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 10 दिसंबर 2024 को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया कि प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति के लिए डीएड उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस फैसले के बाद बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया गया। इन शिक्षकों का कहना था कि सरकार ने भर्ती विज्ञापन में दोनों योग्यताओं को मान्यता दी थी, फिर बीएड शिक्षकों को बाहर करना अन्यायपूर्ण है।

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बर्खास्त शिक्षकों ने लड़ी लंबी लड़ाई

1. बर्खास्त होने के बाद राजधानी के नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना।

2. शिक्षकों ने 14 दिसंबर को अंबिकापुर से रायपुर तक पैदल अनुनय यात्रा से शुरुवात की थी.

3. रायपुर पहुंचने के बाद 19 दिसंबर से यात्रा धरने में बदल गई। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों को अपनी पीड़ा सुनाने के लिए पत्र भी भेजे।

4. 22 दिसंबर को धरना प्रदर्शन शुरू होने के बाद शिक्षकों ने धरना स्थल पर ही ब्लड डोनेशन कैंप लगाया।

5. 26 दिसंबर को आंदोलन में बैठे सहायक शिक्षकों ने अपनी मांगों की तरफ सरकार का ध्यान खींचने के लिए सामूहिक मुंडन कराया। पुरुषों के साथ महिला टीचर्स ने भी अपने बाल कटवाए। कहा कि ये केवल बालों का त्याग नहीं बल्कि उनके भविष्य की पीड़ा और न्याय की आवाज है।

6. 28 दिसंबर को आंदोलन पर बैठे शिक्षकों ने मुंडन के बाद यज्ञ और हवन करके प्रदर्शन किया। कहा कि, अगर हमारी मांगे नहीं मानी गईं, तो आगे सांकेतिक सामूहिक जल समाधि लेने को मजबूर होंगे।

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7. 29 दिसंबर को आदिवासी महिला शिक्षिकाओं ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2 घंटे तक बंगले के सामने मुलाकात के लिए डटे रहे।

8. 30 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर लेकर जल सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर अटल हैं। सरकार तक ये संदेश देना चाहते हैं कि सुशासन में हमारी नौकरी भी बचा ली जाए और समायोजन किया जाए।

9. 1 जनवरी को सभी प्रदर्शनकारियों ने मिलकर माना स्थित बीजेपी कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर का घेराव कर दिया। यहां प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

10. 2 जनवरी को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।

11. 3 जनवरी को सरकार ने एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक कमेटी बनाई। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में 5 अधिकारी शामिल हैं।

12. 3 जनवरी को मांगे पूरी नहीं होने से नाराज सहायक शिक्षकों ने सामूहिक अनशन शुरू किया।

13. 6 जनवरी को शिक्षकों ने राज्य निर्वाचन आयोग जाकर मतदान बहिष्कार के लिए आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा ।

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14. 10 जनवरी को एनसीटीई यानी नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन की शवयात्रा निकालकर प्रदर्शन किया।

15. 12 जनवरी को माना से शदाणी दरबार तक दंडवत यात्रा निकाली गई।

16. 17 जनवरी को पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।

17. 18 जनवरी को मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का सुबह 5 बजे घेराव कर दिया।

18. 19 जनवरी को तेलीबांधा की सड़क में चक्काजाम कर किया प्रदर्शन।

19. 20 जनवरी जिसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने की वजह आंदोलन स्थगित करना पड़ा।

20. शिक्षकों ने कई तरह की रैली निकली, मंत्रियों विधायकों से मिलने की कोशिशें की.

21. शिक्षक होली जैसे त्यौहार में भी घर नही गये और लगातार प्रदर्शन करते रहे.

22. पैदल दांडी मार्च, अर्धनग्न प्रदर्शन, भगत-राजगुरु-सुखदेव बनकर सड़कों पर प्रदर्शन।

23. 1 किलोमीटर की चुनरी यात्रा, राम नवमी पर मंदिर जाने की कोशिश ये सभी की. इसके अलावा भी छत्तीसगढ़ सरकार को ख़ून से चिट्ठी साथ ही सरकार को अल्टीमेटम,

24. जब राष्ट्रपति रायपुर पहुंची तब घुटनों पर रेंगते हुए उनसे मिलने की कोशिश।

25. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 मार्च के दौरे पर बिलासपुर में बर्खास्त बीएड शिक्षकों का प्रदर्शन।