टीआरपी डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शीर्ष नेतृत्व को लेकर बड़े बदलाव की अटकलें तेज़ हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। इस बार संभावनाएं जताई जा रही हैं कि बीजेपी की कमान पहली बार किसी महिला नेता को सौंपी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह पार्टी के इतिहास में एक नया अध्याय होगा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व में महिला चेहरा लाने को लेकर संगठन के भीतर आम सहमति बन चुकी है। इससे बीजेपी महिला सशक्तिकरण के अपने एजेंडे को और मजबूती से सामने रख पाएगी। साथ ही, यह कदम आगामी लोकसभा परिसीमन और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की पृष्ठभूमि में एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।

अध्यक्ष पद की दौड़ में कौन-कौन?

1. निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। हाल ही में उन्होंने पार्टी मुख्यालय में जे.पी. नड्डा और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष के साथ अहम बैठक की थी। उनका प्रशासनिक अनुभव, संगठन कौशल और दक्षिण भारत में प्रभाव उनकी दावेदारी को मजबूती देता है।

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2. डी. पुरंदेश्वरी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और आंध्र प्रदेश बीजेपी की अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी भी रेस में हैं। वह एक अनुभवी बहुभाषी नेता हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों में काम करने का अनुभव रखती हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं पुरंदेश्वरी संगठन के लिए एक संतुलित और अनुभवी विकल्प हो सकती हैं।

3. वानती श्रीनिवासन
कोयंबटूर साउथ से विधायक वानती श्रीनिवासन दक्षिण भारत से उभरती हुई एक प्रमुख नेता हैं। वह 2020 से बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और 2022 में केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं। तमिलनाडु से आने वाली वह पहली महिला हैं जिन्होंने इस स्तर तक पार्टी संगठन में जगह बनाई है।

4. स्मृति ईरानी
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी अध्यक्ष पद की दौड़ में एक संभावित नाम हैं। उन्होंने 2019 में अमेठी में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। वे पहले शिक्षा और फिर कपड़ा मंत्रालय संभाल चुकी हैं। संगठन में उनकी नजदीकियां नरेंद्र मोदी और अमित शाह से उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती हैं।

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बता दें कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की भी इस फैसले में अहम भूमिका मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, संघ नेतृत्व भी इस बार महिला नेतृत्व को समर्थन देने के मूड में है, ताकि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन का संदेश दिया जा सके। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सहमति से ही होगा।

बीजेपी के नए अध्यक्ष को लेकर अब उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। अगर इस बार पार्टी किसी महिला को शीर्ष नेतृत्व सौंपती है, तो यह न केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव होगा, बल्कि महिला मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश बनेगा। अब देखना यह है कि क्या बीजेपी इतिहास रचती है या पारंपरिक ढर्रे पर ही आगे बढ़ती है।