रायपुर। छत्तीसगढ़ की विधानसभा में बुधवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने पिछले 25 वर्षों की परंपरा को तोड़ते हुए राजनीतिक शिष्टाचार का नया अध्याय रच दिया। आमतौर पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और स्थगन प्रस्ताव खारिज होने पर वाकआउट की घटनाएं आम होती हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस ने सत्ता पक्ष के रुख की सराहना भी की।
मामला बिजली दरों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर लाए गए स्थगन प्रस्ताव का था। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इसे सदन में गंभीर मुद्दा मानते हुए चर्चा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिजली दरों में बढ़ोतरी के निर्णय को विस्तार से समझाते हुए इसे जनहितैषी बताया और स्पष्ट किया कि किसानों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं डाला गया है। उनके संतुलित और तथ्यपरक जवाब के बाद अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
परंपरा के विपरीत इस निर्णय पर कांग्रेस ने न तो विरोध जताया, न हंगामा किया और न ही सदन से वाकआउट किया। इसके उलट नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने विषय की गंभीरता को समझा और व्यापक जवाब दिया। उनके इस रुख का सत्ता पक्ष ने तालियां बजाकर स्वागत किया।
सीएम साय ने कही ये बात
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के मुख्यमंत्री को धन्यवाद देने के के बाद साय ने कहा अच्छे कार्यों में पार्टी पॉलिटिक्स नहीं देखी जाती,जिन्होंने धन्यवाद दिया उन्हें धन्यवाद। सज्जन व्यक्ति धन्यवाद देते हैं।



