रायपुर। प्रदेश में हुए CGMSC घोटाले के चलते स्वास्थ्य विभाग को कितना नुकसान पहुंचा है इसका अंदाजा सभी को है, मगर सप्लायर कंपनी की मनमानी के चलते प्रदेश के मरीजों को किस तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही है इसका खुलासा आज विधानसभा में विधायक राजेश मूणत के एक सवाल से हुआ। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कंपनी द्वारा सप्लाई करने के बाद CBC मशीनों की कोडिंग को लॉक कर दिया गया, जिसके बाद से आज तक इन मशीनों को चालू नहीं किया जा सका है।

मूणत ने क्या पूछा सवाल..?

रायपुर विधायक राजेश मूणत ने यह सवाल पूछा कि प्रदेश के जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में खून जांचने वाली मशीनों की सप्लाई क्या इंजीनियरों/सप्लाईकर्ता द्वारा कोडिंग लॉक करने के बाद की गई, इन मशीनों की कोडिंग अनलॉक हो पाई या नहीं? यदि नहीं तो क्यों ? जिन इंजीनियरों एवं सप्लायरों द्वारा मशीनों का कोडिंग लॉक कर सप्लाई की गई उनके विरूद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप पर क्या विधि सम्मत कार्यवाही की गई? यदि नहीं तो क्यों ? और कोडिंग लॉक खुलवाने का क्या-क्या प्रयास किया गया ?

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मंत्री ने कहा- सप्लाई के बाद किया गया लॉक

मूणत के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि खून जांचने वाली सीबीसी मशीनों की इंजीनियरों / सप्लायर द्वारा उपकरण अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सप्लाई करने के पश्चात् कोडिंग लॉक की गई है।

सीजीएमएससी के पास नहीं है सॉफ्टवेयर

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में उक्त मशीनों की कोडिंग अनलॉक नहीं हो पाई है। सीजीएमएससी के पास कोडिंग अनलॉक करने का सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं है। जिन इंजीनियरों एवं सप्लायरों द्वारा मशीनों की सप्लाई के पश्चात् कोडिंग लॉक की गई, उनके विरूद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में राखी थाना, सेक्टर-25 में एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र प्रेषित किया गया है एवं EOW में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

फर्म को किया गया ब्लैकलिस्टेड

बताया जा रहा है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने ही इन मशीनों की सप्लाई की है, जिसके खिलाफ EOW द्वारा कार्यवाही की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने फर्म का नाम लिए बिना बताया कि आपूर्तिकर्ता फर्म को दिनांक 04.02.2025 को 3 वर्ष के लिए काली सूची में डाला गया है।

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नया टेंडर किया गया है जारी

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में मशीन में लगने वाले रिजेंट एवं रखरखाव हेतु निविदा जारी की गई है, जिसमें सफल निविदाकार द्वारा उक्त कोडिंग लॉक, उपकरणों के रखरखाव (कोडिंग अनलॉक) का कार्य किया जावेगा।

गौरतलब है कि CGMSC में मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा अफसरों के साथ मिलीभगत करके जो घोटाला किया गया था, उसके उजागर होने के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री ने इस कंपनी का 50 करोड़ रुपयों का भुगतान करवा दिया था। TRP न्यूज़ ने जब इस घोटाले को प्रकाश में लाया, तब जाकर सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और मामले को EOW ACB के सुपुर्द किया। इसके बाद मोक्षित और CGMSC के जिम्मेदार अफसरों की गिरफ़्तारी हो सकी।