रायपुर। खरोरा थाना क्षेत्र के ग्राम पिकरीडीह स्थित उमाश्री राइस मिल परिसर में संचालित मोजो मशरूम उद्योग में नाबालिग बच्चों से जबरन मजदूरी कराने, मारपीट करने और उन्हें बंधक बनाकर रखने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में बाल संरक्षण अधिकारी संजय कुमार निराला की लिखित शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 3 ठेकेदारों और 1 अन्य आरोपी के खिलाफ मानव तस्करी सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

आरोपियों में ठेकेदार विपिन तिवारी, विकास तिवारी, नितेश तिवारी और भोला शामिल हैं। बताया गया है कि ये ठेकेदार बच्चों को उनके परिजनों से एडवांस राशि का लालच देकर काम पर लाए थे, लेकिन बाद में न सिर्फ मजदूरी का पैसा नहीं दिया गया, बल्कि उनके साथ बर्बरता भी की गई।
छापेमारी के बाद हुआ खुलासा
बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला को 9 जुलाई को वाट्सएप के माध्यम से मशरूम फैक्ट्री में नाबालिगों से जबरन मजदूरी कराए जाने की सूचना मिली थी। अगले दिन महिला एवं बाल विकास विभाग, खरोरा पुलिस, SDM और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापेमार कार्रवाई की और मौके से 97 मजदूरों का रेस्क्यू किया गया।
बच्चों से 20 घंटे करवाते थे मजदूरी
छापे में रेस्क्यू किए गए बच्चों ने खुलासा किया कि उन्हें रात 2 बजे से उठाकर रात 10 बजे तक काम कराया जाता था। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी और पैसे मांगने पर धमकाया जाता था। बच्चों ने यह भी बताया कि अब तक उन्हें एडवांस राशि के अलावा कोई वेतन नहीं दिया गया है।
फरार आरोपियों कि तलाश जारी
खरोरा पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। चारों फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों को रवाना किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह मामला मानव तस्करी, बाल श्रम और शोषण से जुड़ा है, इसलिए इसमें कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रेस्क्यू किए गए मजदूरों को भेजा वापस
छापेमार कार्रवाई में रेस्क्यू किए गए 97 मजदूरों में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और झारखंड के मजदूर शामिल थे। रेस्क्यू के बाद पुलिस ने सभी बंधक मजदूरों की जानकारी लेकर उन्हें उनके घर वापिस भेज दिया है।



