टीआरपी डेस्क। कटनी और जबलपुर में सालों से चल रही अवैध खुदाई पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। मध्यप्रदेश सरकार ने बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़ी तीन माइनिंग कंपनियों से 520 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें से 440 करोड़ रुपये अवैध आयरन अयस्क खनन के हैं, जबकि बाकी 80 करोड़ रुपये से ज्यादा GST चोरी का जुर्माना है।

ये कार्रवाई निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग और पेसिफिक एक्सपोर्ट नाम की तीन कंपनियों पर हुई है। इन कंपनियों ने घोषित सीमा और पर्यावरणीय मंजूरी से काफी ज्यादा खनन किया। जांच में सामने आया कि इन्होंने सिहोरा तहसील के दुबियारा, घुघरी, प्रतापपुर, अगरिया और टिकरिया में खदानें चलाईं वो भी तय दायरे से कहीं आगे जाकर।

जनवरी 2025 में आशुतोष उर्फ मनु दीक्षित नाम ने आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (EOW) में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर सरकार ने अप्रैल में खनिज विभाग की टीम गठित की, जिसने सैटेलाइट इमेजरी और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (IBM) के आंकड़ों के आधार पर खनन की मात्रा की जांच की।

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रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि निर्धारित क्षेत्र से काफी आगे जाकर अवैध खनन हुआ। यही नहीं, कंपनियों के दफ्तरों से कई जरूरी दस्तावेज और फाइलें गायब मिलीं, जो संदेह को और गहरा करती हैं।

अभी पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है

शिकायतकर्ता दीक्षित का कहना है कि सरकार ने फिलहाल सिर्फ दो बिंदुओं अतिरिक्त खनन और GST चोरी की जांच की है। जबकि अवैध खनन, फॉरेस्ट रॉयल्टी की चोरी, वन क्षेत्र में खुदाई और अन्य गंभीर आरोपों पर जांच अभी बाकी है।

अगर ईमानदारी से पूरी जांच हुई, तो सिर्फ कटनी-जबलपुर इलाके में अवैध खनन का आंकड़ा 8,000 से 10,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

क्या हो रहा है आगे?

जांच दल ने रिपोर्ट में कहा है कि अभी सिर्फ खनन योजना और पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के उल्लंघन की जांच हुई है। वन क्षेत्र और अन्य गंभीर अनियमितताओं की पड़ताल अगले चरण में की जाएगी। राजस्व वसूली की प्रक्रिया जबलपुर कलेक्टर स्तर पर शुरू हो गई है, जबकि टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में विभागीय आंकलन के बाद कार्रवाई की जाएगी।

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यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले प्रफुल्ल सामंता बनाम भारत सरकार के बाद मुमकिन हुई, जिसके तहत पूरे राज्य में सैटेलाइट के ज़रिए खदानों की निगरानी शुरू की गई है।

संक्षेप में, मामला सिर्फ एक विधायक या तीन कंपनियों का नहीं, बल्कि उस पूरी प्रणाली का है जिसने अवैध माइनिंग को नजरअंदाज कर रखा था। लेकिन अब सरकार की नजरें खुल गई हैं।