रायगढ़। औद्योगिक जिले के टैग के साथ रायगढ़ को प्रदूषण, फ्लाई ऐश, बीमारिया और सड़क हादसे सौगात में मिले हैं। यहां दिन-ब-दिन ऐसी समस्याएं बढ़ती जा रही है लेकिन अब इन मामलों के खिलाफ आवाज उठने लगे हैं। प्रदूषण और फ्लाई ऐश डंपिंग के खिलाफ जिला कलेक्टर, जिला सत्र न्यायालय और जिला पुलिस अधीक्षक से इसकी शिकायत और जांच की मांग की गई है। शिकायत में दावा है कि अगर फ्लाई ऐश परिवहन की सही तरीके से जांच की जाए तो यह पूरा मामला एक बड़े घोटले के रूप उजागर हो सकता है।

क्या है फ्लाई ऐश स्कैम ?

बिजली पैदा करने वाले उद्योगों के लिए कोयला जलने के बाद बची हुई राख जिसे फ्लाई ऐश कहते हैं। इसे डंप करना कंपनियों के लिए एक बड़ी समस्या बन जाती है। इन उद्योगों के पास राख के पहाड़ देखे जा सकते हैं। गर्मी के समय यह उड़कर घरों और खेतों तक पहुंच जाते हैं तो बरसात में बहकर कीचड़ का रूप ले लेते हैं। इसकी डंपिंग के लिए पर्यावरण विभाग द्वारा नियम बनाए गए हैं। लेकिन इसकी डंपिंग में भी रायगढ़ में बड़ा स्कैम चल रहा है।

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घोटाले का गजब तरीका

उद्योगों को कम से कम 75% राख का निपटान महीने भर के भीतर करना होता है, नहीं तो उन पर पेनल्टी या कार्रवाई की जाती है। इसलिए उद्योगों द्वारा इसके परिवहन के लिए टेंडर जारी किए जाते हैं। स्कैम कुछ ऐसा है कि फ्लाई ऐश को कंपनियों से 200 किलोमीटर की दूरी पर किसी जगह पर डंप करना है। फ्लाई ऐश परिवहन करने वाले 200 किलोमीटर के हिसाब से भाड़ा तो लेते हैं लेकिन फ्लाई ऐश आसपास के 10 से 20 किलोमीटर के दायरे में ही किसी भी खाली या सुनसान जगह पर फेंक कर चले जाते हैं। ट्रांसपोर्टिंग की गाड़ी के GPS को किसी छोटी गाड़ी में लगा दिया जाता है। ताकि ट्रेसिंग के समय गाड़ी का लोकेशन सही दिखे।

हालही में मिला सबूत

हाल ही में NTPC से निकलने वाली 6 फ्लाई ऐश से भरी गाड़ियां कलमी में जिंदल के अधिकृत क्षेत्र में गिरा दी गई। हालांकि यह गाड़ियां यहां से बहुत दूर, रायपुर और बलोदाबाजार के लिए निकली थी। गाड़ियों का लोकेशन कुछ और ही दिख रहा था लेकिन असल में गाड़ियों में भरा फ्लाई ऐश पास ही कलमी में ही डंप कर दिया गया था।

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मामले में कार्रवाई

जिंदल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी शिकायत की। मामला हाइलाइट होने के बाद पर्यावरण विभाग ने कार्रवाई की और NTPC प्रबंधन ने भी कुछ ट्रांसपोर्टर्स पर जुर्माना कार्रवाई की। कलेक्टर ने भी इस मामले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को इन पर नज़र रखने की हिदायत दी है।

सिंडिकेट का प्रभाव

वैसे यह सिंडिकेट कितना प्रभावी है। इसे ऐसे समझा जा सकता हैं कि जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में कार्रवाई तो की लेकिन प्रेस नोट में भी कार्रवाई की चपेट में आए तीनों ट्रांसपोर्टर के नाम तक नहीं बताए गए।

जुर्माना काफी नहीं, जांच की मांग

सूत्र बताते हैं कि उद्योग प्रबंधनो और कुछ खास ट्रांसपोर्टर फर्म की मिली भगत से चलने वाला यह खेल इतना बड़ा है कि आसानी से नहीं रुकने वाला। महीने भर पहले शिकायत भी हुई है। हाल ही में प्रशासन को सबूत भी मिला हैं। जिला कलेक्टर और पर्यावरण विभाग की जुर्माना कार्रवाई भी दिख रही है। कुछ छोटे-मोटे ट्रांसपोर्टर पर कार्रवाई कर देने से करोड़ों का यह खेल रुकने नहीं वाला है। इस मामले में गंभीर प्रशासनिक जांच की आवश्यकता है।

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बड़ा मुनाफा कमाने के लिए रायगढ़ की मिट्टी में धीमा जहर मिलाया जा रहा है। शिकायत तो हो चुकी है, सबूत भी मिल चुका है, आगे का काम जिम्मेदारों का है। हो सकता है कि जांच में यह मामला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े घोटालों में से एक बनकर सामने आए