बिलासपुर। प्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त और आयुक्त की नियुक्ति को लेकर तय किए गए मापदंड एकाएक किये गए बदलाव को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई है। इस मामले में जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अपना जवाब प्रस्तुत करने कोर्ट से समय की मांग की। कोर्ट ने दो दिन का समय देकर 29 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है।
बता दें कि कोर्ट ने 29 मई 2025 को मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्त के पद पर की जाने वाली नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार की ओर से जवाब देते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने स्थगन आदेश को हटाने की मांग की। इस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने रिज्वाइंडर प्रस्तुत करने समय मांगा। अधिवक्ताओं ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सुनवाई की तिथि पर वे बहस करेंगे।
मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने के बाद अनुभव की जो नई शर्त जोड़ दी गई है उसके खिलाफ हाई कोर्ट में अनिल तिवारी, डॉ दिनेश्वर प्रसाद सोनी व अन्य ने याचिका दायर की है। दायर याचिका में मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त की नियुक्ति में अनुभव की नई शर्त जोड़े जान को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त की नियुक्ति पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था।
नियमों में बदलाव के खिलाफ याचिका
इस याचिका में कहा गया है कि जब मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पदों के लिए राज्य शासन ने विज्ञापन जारी किया तब आवेदन के लिए अनुभव की कोई विशेष शर्त नहीं रखी गई थी। 9 मई 2025 को जारी इंटरव्यू कॉल लेटर में सर्च कमेटी ने विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंपर्क या प्रशासन के क्षेत्र में कम से कम 25 वर्षों के अनुभव की अनिवार्यता जोड़ दी। इसी नई मापदंड के आधार पर 172 आवेदनों में से सिर्फ 51 को ही इंटरव्यू के लिए चुना गया। मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 30 वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता जोड़ दी गई। नई जोड़ी गई शर्तों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिस पर सुनवाई चल रही है।


