टीआरपी डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक लगातार सोने की खरीदी कर रहा है। भारत का गोल्ड रिजर्व में इज़ाफा हो रहा है। बीते कुछ सालों से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गोल्ड की खरीददारी बढ़ा दी है। इस जून में फिर से RBI ने सोने की बड़ी खरीददारी की है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जून 2025 में आधा टन सोने की खरीदी की है।

भारत के पास कितना सोना ?

RBI ने जून के आखिरी हफ्ते में आधा टन सोना खरीदा था। RBI की इस गोल्ड शॉपिंग से भारत का गोल्ड रिजर्व बढ़ गया है। 27 जून से पहले भारत के सोने का भंडार 879.6 टन था, जो अब बढ़कर 879.8 टन हो गया है। यानी एक हफ्ते में RBI ने करीब 4 क्विटंल की फ्रेश खरीदारी की है। इससे पहले अप्रैल 2025 में RBI ने 57.5 टन सोना खरीदा था और इस खरीददारी के बाद भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया था।

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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। भारत के फॉरेन एक्सचेंज में सोने की हिस्सेदारी 8.9% से बढ़कर 12.1% हो गई है।

RBI क्यों कर रही सोने की खरीदी ?

सोना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। सोना हमेशा से सेफ हेवन यानी मुसीबत के समय काम आने वाला सोर्स समझा जाता है। जिस तरह आम लोग सोने की खरीदी कर संकट के समय खुद को सुरक्षित रखते हैं, उसी तरह रिजर्व बैंक भी अपना गोल्ड भंडार बढ़ा रहा है। इसके पीछे RBI की रणनीति है कि वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बनाकर, जोखिमों से सुरक्षित रखना चाहता है। खास बात ये है कि दुनिया भर के बाजारों में आसमान छू रहे सोने के दाम, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ की धमकियों और बढ़ते ट्रेड वॉर की संभावना के बीच RBI ने सोने की शॉपिंग बढ़ा दी है।

इतने सोने का क्या करेगा भारत ?

गोल्ड रिजर्व बढ़कर रिजर्व बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम कर रहा है। कहते हैं कि जिसके पास जितना सोना, वो देश उतना ही मजबूत। RBI दम भर सोना खरीद कर भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की कोशिशों में लगा है। गोल्ड रिजर्व को बढ़ाकर ग्लोबल वैश्विक अनिश्चितताओं और मंदी के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने की हर संभव कोशिश कर रहा है। वैश्विक-आर्थिक अनिश्चितताओं और डॉलर की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बैंक अपने सोने का भंडार बढ़ा रहा है।

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भारत को कैसे सुरक्षित रखेगा सोना ?

गोल्ड रिजर्व को लेकर RBI की यह नीति न केवल आर्थिक स्थिरता बढ़ाएगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और विदेशी कर्ज के जोखिम को भी कम करेगी। सोने का भंडार बढ़ाकर भारतीय रूपए को मजबूती देने की कोशिश हो रही है। RBI की ओर से सोने की खरीददारी भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। जिसकी बदौलत वो वैश्विक वित्तीय अस्थिरता से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित बनाए रख सकता है।