टीआरपी डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर तंज कसते हुए इसे ‘डेड इकॉनमी’ कहा और 25% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। हालांकि ये शुल्क 1 अगस्त से अब एक हफ्ते के लिए टाल दिए गए हैं। बयान भले ही सुर्खियों में रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और है भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जबकि ट्रंप के अपने देश की आर्थिक तस्वीर काफी कमजोर हो चुकी है।

अमेरिका की आर्थिक हालत: आंकड़े खोल रहे हैं ट्रंप की पोल

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की इकोनॉमी को लेकर जो बड़े-बड़े दावे किए गए थे, वे अब सवालों के घेरे में हैं।

  • नौकरियों में गिरावट: अप्रैल के बाद से अमेरिका में 37,000 मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खत्म हुईं।
  • कमजोर जॉब डेटा: जुलाई में सिर्फ 73,000, जून में 14,000, और मई में 19,000 नई नौकरियां ही जुड़ पाईं।
  • बढ़ती महंगाई: टैरिफ और नीतिगत अस्थिरता की वजह से मुद्रास्फीति पर काबू नहीं है।
  • धीमी विकास दर: पिछले साल की तुलना में अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी सुस्त हो चुकी है।
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फेडरल रिजर्व पर ठीकरा, रिपोर्टिंग एजेंसी पर कार्रवाई

जब ट्रंप को जवाब नहीं सूझा तो उन्होंने सीधे फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल को निशाने पर ले लिया, ब्याज दरों में कटौती की मांग की, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। उधर, निराशाजनक रोजगार रिपोर्ट आने के बाद उस एजेंसी के प्रमुख को भी हटा दिया गया जिसने ये आंकड़े जारी किए थे।

टैरिफ से खुद अमेरिका को नुकसान

ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाए, लेकिन अमेरिका के ही उपभोक्ताओं और उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ा। पूर्व राष्ट्रपति जो बिडेन पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि यह नीति या तो अमेरिका को फायदा देगी या फिर ले डूबेगी।