बिलासपुर। न्यायधानी में एक कॉलोनी के निर्माण पर रोक लगाने के बावजूद यहां टुकड़ों में जमीन बेची जा रही थी। इस पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्यवाही करने की चेतावनी दी है। बिलासपुर-रायपुर रोड स्थित सेक्टर डी के पास मंडपम भवन के बगल में एक कॉलोनी को लेकर यह मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां विकास अनुमति रद्द होने के बावजूद जमीन के टुकड़े करके बेची जा रही है। इस पर कार्रवाई करते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 10 अधिकारियों की एक जांच समिति बना दी है।
यह कॉलोनी बिल्डर शैलेंद्र जायसवाल व उनके परिवार द्वारा विकसित की जा रही है। पहले इस जमीन पर कॉलोनी बसाने की अनुमति मिली थी, लेकिन 2008 में अतिरिक्त कलेक्टर ने यह अनुमति रद्द कर दी थी। इसके बाद भी टुकड़ों में प्लॉट बेचने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मामले में की गई अपील भी खारिज हो चुकी है।
हो सकती है कठोर कार्रवाई
अब शिकायतों की पुष्टि होने पर बिलासपुर नगर निगम, नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 (ग) और (च) के तहत कॉलोनी और पूरी जमीन का अधिग्रहण कर सकता है। साथ ही प्लॉट बेचने के सभी सौदे रद्द घोषित किए जा सकते हैं और जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी। ग्राम तिफरा की करीब 19.35 एकड़ ज़मीन के कई खसरा नंबरों पर यह कॉलोनी बनाई जा रही थी। पहले अनुमति मिलने के बाद उसे रद्द किया जा चुका है। बावजूद इसके वहां अवैध प्लाटिंग और बिक्री की जा रही है।
कलेक्टर ने राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों को मिलाकर 10 सदस्यीय जांच समिति बनाई है। इसमें एडीएम मनीष साहू, तहसीलदार गरिमा ठाकुर के अलावा नगर एवं ग्राम निवेश, पंजीयन विभाग, राजस्व विभाग तथा नगर निगम के इंजीनियर व अधिकारी शामिल हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि समिति जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपे।


