टीआरपी डेस्क। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने राज्य की Special Intensive Revision (SIR) ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा के नाम पर 2 अलग-अलग EPIC (वोटर ID) कार्ड बने हुए हैं, जो 2 अलग निर्वाचन क्षेत्रों, पटना और लखीसराय में पंजीकृत हैं और इसमें जन्मतिथि/उम्र भी अलग-अलग दर्ज है। उन्होंने दोनों EPIC के डिजिटल विवरण मीडिया के सामने पेश किया है।

तेजस्वी यादव का सवाल
तेजस्वी ने सवाल उठाते हुए पूछा “क्या यह SIR प्रक्रिया का दोष है या खुद डिप्टी CM की कथित “धांधली”?” वहीं, विजय कुमार सिन्हा ने सफाई में कहा कि उन्होंने 5 अगस्त को पटना से नाम हटवाने के लिए BLO को आवेदन दिया है, जिससे दोबारा पंजीकरण की समस्या हो सकती है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
प्रारंभिक जांच में, आयोग ने आरवीसी संख्या RAB0456228 को सत्यापित कर बताया कि यह पहले के सालों (2015, 2020) में इस्तेमाल भी की गई है और वर्तमान ड्राफ्ट लिस्ट में भी मौजूद है। दूसरी संख्या, RAB2916120, किसी आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं मिली, इसकी उत्पत्ति और सत्यता की जांच की जा रही है।
निर्वाचन आयोग ने तेजस्वी यादव को नोटिस जारी किया और उनसे संदिग्ध EPIC कार्ड (RAB2916120) को 16 अगस्त तक जांच के लिए सौंपने का निर्देश दिया है। इस कथित फर्जी दस्तावेज के उपयोग को आपराधिक प्रावधानों के तहत जांचा जाएगा।
राजनीतिक झंझावात
दूसरी ओर, तेजस्वी ने आयोग पर फर्जी EPIC की कहानी बनाने, SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और जनताविरोधी छंटनी का आरोप लगाया है। NDA नेताओं ने RJD नेता पर 2 वोटर ID रखने का आरोप लगाते हुए इसे अपराध करार दिया और चुनाव आयोग से FIR दर्ज करने की मांग की है।
SIR ड्राफ्ट लिस्ट विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने बिहार में लगभग 65.6 लाख नामों की छटनी की है, जिससे राज्य की मतदाता संख्या लगभग 7.89 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ हो गई है, यह व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय बना हुआ है।
ये आरोप और प्रतिक्रिया बिहार की राजनीतिक गतिशीलता को और भी गर्म बना रहे हैं, विशेषकर विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की समीक्षा पर राजनीति की तीव्रता दिखाई दे रही है।


