शिवपुरी। मध्यप्रदेश में कुपोषण के खिलाफ लगातार सफलताएं मिल रही है। 20 सालों में कुपोषण के मामले में भारी कमी भी दर्ज की गई है। लेकिन, शिवपुरी में 1 साल 3 महीने के बच्ची की कुपोषण से मौत हो गई। लेकिन, ससुराल पक्ष ने बेटे की चाह में बच्ची का इलाज नहीं कराया। कुपोषण से बच्ची की हालत बिगड़ने पर मां ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान दिव्यांशी धाकड़ ने दम तोड़ दिया। इस दौरान ससुराल पक्ष से बच्ची को देखने अस्पताल कोई नहीं पहुंचा।

स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल

इस बीच, कुपोषण से निजात पाने के तमाम तरह के दावे की पोल खुल गई। वर्तमान में भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। जिससे एक बात जरूर पता चलती है कि, स्वास्थ्य विभाग कागजों में जो दावे करता है, लेकिन, जमीमी हकीकत कुछ ओर ही बंया करती है।

राज्य सरकार ने जारी की है कई योजनाएं

दरअसल, मध्यप्रदेश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू की गई है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका राज्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की पहचान और उनके परिवारों को पोषण संबंधी सलाह देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यकर्ताओं के प्रयासों से कुपोषण में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

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अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन के तहत राज्य सरकार ने अपने वित्तीय संसाधनों से कुपोषण निवारण के लिए योजनाएं बनाई हैं। इस योजना में हर जिले की आवश्यकता के अनुसार कार्य योजना बनाकर कुपोषण निवारण के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। समुदाय की सहभागिता, समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रमों के तहत गभर्वती महिलाओं, धात्री माताओं, और 6 माह से 24 माह के बच्चों को लक्षित किया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों में नियमित रूप से मंगल दिवस मनाया जाता है, जिसमें पोषण से संबंधित जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।