टीआरपी डेस्क। हिंदू धर्म में विवाहित स्त्रियों द्वारा पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना से कई व्रत रखे जाते हैं। इनमें से हरतालिका तीज और करवा चौथ सबसे प्रमुख माने जाते हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को मनाया जा रहा है, जबकि करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा।
हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण विवाहित महिलाएं यह व्रत अपने पति के दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छे पति की कामना से उपवास रखती हैं।
- इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं।
- सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद दिनभर बिना भोजन और पानी के व्रत किया जाता है।
- रातभर जागरण कर भगवान शिव-पार्वती का स्मरण और पूजन होता है।
- अगले दिन सूर्योदय पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
- महिलाएं इस अवसर पर 16 श्रृंगार करती हैं और लाल-हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं।
करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह व्रत भी निर्जला उपवास के रूप में रखा जाता है और पति की लंबी आयु के लिए समर्पित होता है।
- महिलाएं दिनभर भूखी-प्यासी रहकर करवा माता की पूजा करती हैं।
- पूजा में गंगाजल, धूप-दीप, नैवेद्य, रोली, फूल और करवे का विशेष महत्व होता है।
- दिनभर कथा सुनने के बाद शाम को चांद निकलने पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
- पति के हाथ से पानी ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
क्षेत्रीय महत्व
- हरतालिका तीज मुख्य रूप से उत्तर भारत, राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार में अधिक प्रचलित है।
- करवा चौथ विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
इन दोनों व्रतों का मूल उद्देश्य पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना है, लेकिन उनकी पूजा-पद्धति और मान्यताओं में अंतर देखने को मिलता है।



