Chhattisgarh News: ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली मितानिनों की हड़ताल अब और तेज होने जा रही है। 7 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन आंदोलन के बीच सोमवार को रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मितानिन संगठन ने ऐलान किया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 4 सितंबर को प्रदेशभर से 75 हजार से ज्यादा मितानिनें राजधानी में जुटकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगी।

मितानिनों की प्रमुख मांगों में मानदेय वृद्धि, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ शामिल है। उनका कहना है कि गांव-गांव में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं देने के बावजूद उन्हें आज भी केवल प्रोत्साहन राशि पर काम करना पड़ता है।

हड़ताल के चलते ग्रामीण अंचलों में टीकाकरण, पोषण कार्यक्रम, प्राथमिक उपचार और गर्भवती महिलाओं की देखरेख जैसी सेवाएं ठप हो गई हैं। कई गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट गहराता जा रहा है।

गौरतलब है कि 2002 में शुरू हुआ मितानिन कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की अपनी पहल थी, जिसने बाद में पूरे देश में आशा कार्यकर्ता योजना का आधार बनाया। दो दशक से ज्यादा समय से मितानिनें टीकाकरण, पोषण सुधार, मातृत्व देखभाल और रोग-निवारण में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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फिलहाल सरकार और मितानिन संगठन के बीच बातचीत की कोशिशें नाकाम रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि 4 सितंबर को राजधानी में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने से हालात और बिगड़ सकते हैं।