टीआरपी डेस्क। Lingeshwari Mata Worship : भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी मान्यताओं के लिए विख्यात है। न केवल प्रदेश के बल्कि दूर-दराज से लोग भी मंदिर के दर्शन को आते हैं. ऐसा ही एक मंदिर कोंडागांव जिले के आलोर गांव में हैं, जो कि काफी अनोखा होने के साथ प्रदेश समेत पड़ोसी राज्यों में भी इसके चमत्कार प्रसिद्ध है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी के ऊपर शिव और शक्ति की मूर्ति स्थापित है। जिनकी पूजा लिंग स्वरूप में होती है। इसलिए इन्हें लिगेश्वरी माता और लिंगई माता भी कहा जाता है।

Lingeshwari Mata Worship : भादोमास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के बाद माता का दरबार सिर्फ एक दिन के लिए यानी कि, सिर्फ 12 घंटे के लिए खुलता है। साल 2025 में मंदिर के द्वार 3 सितंबर को खुलेंगे. जिसकी तैयारियां कर ली गई है. श्रद्धालु 3 दिन पहले से पहाड़ी पर पहुंचने लगे हैं. पहले माता की गुफा का कपाट जल्दी बंद कर दिया जाता था। लेकिन, भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर देरी तक खुला रहता है. नक्सल इलाका होने की वजह से सुरक्षा के घेरे में भक्त मां के दर्शन करते हैं। मंदिर की मान्यता है कि, निसंतान दंपत्ति को संतान की प्राप्ति होती है। इसलिए कपाट बंद होने के बाद मंदिर के बाहर काफी खीरा पड़ा दिखता है। क्यों कि प्रसाद के तौर पर निसंतान दंपत्ति को खीरा दिया जाता है।

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बड़ी संख्या में पहुंचते है श्रद्धालु

Lingeshwari Mata Worship : लिंगई माता के दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. परम्परानुसार इस प्राकृतिक मंदिर में प्रतिदिन पूजा नहीं होती है. इस मन्दिर का कपाट केवल साल में एक दिन ही खुलता है. इसी दिन यहां विशाल मेला भी लगता है. इस अनोखे गुफा में 30 के करीब व्यक्ति बैठ सकते हैं। चट्टानों के बीचों-बीच में 2 फुट की शिवलिंग है. बताया जाता है कि, इसकी ऊंचाई पहले बहुत कम थी. लेकिन समय के साथ शिवलिंग की ऊंचाई बढ़ रही है.

द्वार बंद करने से पहले गुफा में बिछाई जाती हैं रेत

Lingeshwari Mata Worship : मंदिर के बाहर सतह पर रेत बिछा दी जाती है. इसके अगले साल इस रेत पर जो पदचिन्ह मिलते हैं, उससे पुजारी अगले साल के भविष्य का अनुमान लगाते हैं. उदाहरण स्वरूप यदि कमल का निशान हो तो धन-संपदा में बढ़ोत्तरी होती है. हाथी के पांव के निशान हो तो उन्नति, घोड़ों के खुर के निशान हों तो युद्ध, बाघ के पैर के निशान हो तो आतंक और मुर्गियों के पैर के निशान होने पर अकाल होने का संकेत माना जाता है.

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लिंगेश्वरी माता से जुड़ी है कई मान्यताएं

Lingeshwari Mata Worship : लिंगई देवी से जुड़ी दो खास और प्रचलित मान्यताएं हैं. पहली मान्यता संतान प्राप्ति को लेकर है. कहा जाता है कि यहां निःसंतान अगर अर्जी लगाते हैं, तो संतान की प्राप्ति जरूर होती है. संतान प्राप्ति की चाह रखने वाले दंपत्ति यहां पर खीरा चढ़ाते हैं. जिसे पुजारी पूजा के बाद प्रसाद के रूप में उन्हें वापस लौटा देता है. जिसके बाद दंपत्ति खीरे को नाखून से चीरा लगाकर उसे दो टुकड़े में तोड़कर प्रसाद के तौर पर ग्रहण करता है।