नई दिल्ली/इस्लामाबाद। Operation Sindoor: पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से तनाव के दौरान भारत ने अमेरिका की ओर से मध्यस्थता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। डार के इस दावे से एक बार फिर साबित हो गया कि भारत ने पाकिस्तान से युद्धविराम का फैसला किसी तीसरे पक्ष के दखल के कारण नहीं लिया था।
Operation Sindoor: पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के खत्म होने के करीब चार महीने बाद आया है। भारतीय सेना ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था, जिसके तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भारतीय DGMO को फोन करके युद्धविराम की अपील की थी।
Operation Sindoor: भारत को मंजूर नहीं था तीसरे पक्ष
इशाक डार ने मंगलवार को अलजजीरा को एक इंटरव्यू दिया। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि पिछले दिनों संघर्ष के दौरान विवाद को सुलझाने के लिए क्या पाकिस्तान तीसरे पक्ष को शामिल करने के लिए तैयार था? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हां हम इसके लिए तैयार थे। लेकिन भारत ने इसे कभी भी मंजूर नहीं किया। उन्होंने भारत के रुख पर बात करते हुए कहा कि, भारत कभी भी विवाद सुलझाने के लिए तीसरे पक्ष को शामिक करने के पक्ष में नहीं था। उसने हमेशा इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताया।
Operation Sindoor: पाकिस्तानी विदेश मंत्री का यह बयान कई मायनों में अहम है। 10 मई को डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच सीजफायर की जानकारी दी थी और तब से अब तक वे 30 से ज्यादा बार इसका श्रेय ले चुके हैं। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि यह सीजफायर आपसी बातचीत का नतीजा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं रही। अब पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इस बयान से भारत की बात एक बार फिर सच साबित हो गई है।
Operation Sindoor: भारत से विवाद सुलझाने को तैयार
डार ने आगे बताया कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से पूछा था कि क्या अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने में कोई भूमिका निभा रहा है। इस पर रूबियो ने जवाब दिया कि भारत का यह स्पष्ट रुख है कि यह मामला पूरी तरह द्विपक्षीय है। डार ने आगे कहा कि पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने के लिए किसी से भी बातचीत करने को तैयार है और हमारा मानना है कि संवाद ही समाधान का रास्ता है।



