Dr. Alok Shukla, accused in the NAN scam, surrenders: टीआरपी।
प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों में से एक नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला मामले में आरोपी रिटायर्ड प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने शुक्रवार को ईडी की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। ईडी ने डॉ. शुक्ला के निवास पर छापेमारी की थी।
गौरतलब है कि नान घोटाला प्रकरण का एक अन्य आरोपी अनिल टुटेजा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। उसके खिलाफ आबकारी घोटाले का भी प्रकरण दर्ज है। डॉ. शुक्ला को हाईकोर्ट से जमानत मिली हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके बाद से ही शुक्ला को गिरफ्तार करने की चर्चा जोरों पर चल रही थी। गिरफ्तार करने से पूर्व ही डॉ. शुक्ला ने ईडी की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
10 ठिकानों पर छापा
ईडी ने 36000 करोड़ रुपये के नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले में पूर्व आईएएस आलोक शुक्ला, ट्रांसपोर्टर सुधाकर रावटे सहित अन्य लोगों के 10 ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की थी। गुरुवार को भिलाई में हुड़को और तालपुरी स्थित ठिकानों पर छापा मारा गया। आलोक शुक्ला घर में मौजूद नहीं था, तब घर पर नोटिस चिपकाया गया था। घर की तलाशी के दौरान लेनदेन, प्रॉपर्टी, और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिला था।
उल्लेखनीय है कि 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. शुक्ला और अनिल टूटेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। आलोक शुक्ला दो पहले ही भोपाल चले गए थे। इसके पहले ईओडब्ल्यू कस्टम मिलिंग घोटाले में मुख्य आरोपी पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा और रायपुर के होटल कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों इस समय शराब और कस्टम मिलिंग घोटाले में जेल भेजे गए है। बता दें कि कस्टम मिलिंग घोटाले में जेल भेजे गए मार्कफेड के तात्कालीन एमडी मनोज सोनी और राइस मिल एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया है।
क्या है नान घोटाला
नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में आरोपियों ने 2015 में घोटाला किया था। इसी घोटाले से कस्टम मिलिंग भी जुड़ा हुआ था। जहां मिलर्स को कस्टम मिलिंग के लिए 40 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाता था, जिसे तत्कालीन राज्य सरकार ने बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया। इसके भुगतान के एवज में मिलर्स से 20 रुपए प्रति क्विंटल की कट मनी वसूली गई। इसका भुगतान करने वालों के बिल पास किए गए। कमीशन नहीं देने वालों का भुगतान रोक दिया गया था।


