टीआरपी डेस्क। Election Commission in Action : देशभर में राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने पिछले 6 वर्षों से चुनाव न लड़ने और चुनावी खर्च का ब्योरा न देने वाले 474 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को रजिस्टर्ड पार्टियों की सूची से हटा दिया है। इस सफाई अभियान की सीधी चपेट में तमिलनाडु की 42 पार्टियां भी आई हैं।

क्या है पूरा मामला ?

चुनाव आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत RUPPs के रिव्यू में पाया कि कई पार्टियां वर्षों से निष्क्रिय हैं। कुछ पार्टियों ने लगातार 6 साल से कोई भी चुनाव नहीं लड़ा है, वहीं कुछ ने चुनावी खर्च का ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं किया। इसी आधार पर आयोग ने देशभर में 474 पार्टियों को सूची से बाहर कर दिया है।

इन राज्यों से हटाए गए नाम

18 सितंबर की डीलिस्टिंग में उत्तर प्रदेश से 121, सेमहाराष्ट्र से 44, तमिलनाडु से 42, दिल्ली से 40, पंजाब से 21, मध्य प्रदेश से 23, बिहार से 15 और आंध्र प्रदेश से 17 पार्टियों को सूचि से हटाया गया।

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2 चरणों में हटाए गए 808 दल

चुनाव आयोग ने यह राष्ट्रव्यापी अभियान जून 2025 में शुरू किया था। जिसके बाद 9 अगस्त 2025 को पहले चरण में 334 दलों को सूची से हटाया गया था और अब दूसरे चरण में 474 दलों को डीलिस्ट किया गया है।

चुनाव आयोग का ‘सफाई अभियान’

बीते 2 महीनों में 808 पार्टियों को लिस्ट से हटाया जा चुका है। 359 और दलों की समीक्षा जारी है। अगर वे आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं करते पाए तो उन्हें भी लिस्ट से हटाया जा सकता हैं।

चुनाव आयोग की चेतावनी

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगे भी जो राजनीतिक दल निर्धारित मापदंडों का उल्लंघन करेंगे, जैसे कि चुनाव न लड़ना, खर्च का ब्यौरा न देना, वार्षिक रिपोर्ट जमा न करना, तो उनके खिलाफ पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई जारी रहेगी। यह फैसला राजनीतिक प्रणाली को साफ करने की दिशा में निर्णायक कदम है।