खडगवां/एमसीबी। सरकारी निर्माण कार्य का जब विभागीय इंजिनियर इस्टीमेट तैयार करते हैं, तब निर्माण कुछ बड़ा हो और बड़ी रकम खर्च हो इसका विशेष ध्यान रखा जाता है, मगर सरगुजा संभाग के एमसीबी जिले में आरईएस विभाग के इंजिनियरों ने लगभग 40 मीटर नाले के ऊपर छोटा सा पुल बना दिया। इसका नुकसान तब समझ में आया जब तेज बारिश हुई और कुछ किसानों की फसल बह गई।

एमसीबी जिले के खडगवां जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत डुबछोला में नयापारा-गुरघेला नाले पर आरईएस द्वारा इस पुल का निर्माण कराया गया है। ज़मीनी हकीकत यह है कि जहाँ पुल की लंबाई 40 से 50 मीटर होनी चाहिए थी, वहीं मात्र 6 मीटर का पुल बनाकर पूरा मामला ही निपटा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, 40-50 मीटर के पुल का अनुमानित खर्च 20 लाख से अधिक आता और इसके लिए निविदा प्रक्रिया भी अनिवार्य है, लेकिन अफसरों ने ऑफिस में बैठकर ऐसा स्टीमेट तैयार किया, जिससे उनकी कमीशनखोरी पर असर ना पड़े। नतीजा यह हुआ कि 40-50 मीटर चौड़े नाले को मात्र 6 मीटर के आकार तक समेट दिया गया।

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बारिश में बह गया एप्रोच रोड

यहां बरसात के शुरू होते ही गुरघेला नाला उफान पर आया और पुल के शेष हिस्से में बनाए गए एप्रोच रोड की मिट्टी पलभर में बह गई। परिणामस्वरूप चार किसानों हरक लाल, बालमुकुंद, बारेनाल और नंदलाल की खड़ी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। खेत का एक हिस्सा भी पानी में बह गया।

आवाजाही हुई बाधित

ग्रामीणों ने बताया कि पुल से जुड़ा मुख्य मार्ग कट जाने के कारण नन्हे मुन्हे बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतें बढ़ गई हैं। वहीं स्थानीय लोग बड़ी मुश्किल से मुख्य मार्ग तक पहुंच पा रहे हैं। 

ग्रामीणों को अफसरों ने इस तरह धमकाया

इस पुल को लेकर जब पीड़ित किसानों ने फोन पर अपनी समस्या अधिकारियों को बताई तो वे भड़क उठे और गुस्से में यहां तक कह दिया कि “जो छपवाना है, छपवा दो।” 

ग्रामीण बताते हैं कि जिस नाले पर पुल बनाया गया, वह क्षेत्र का सबसे तेज बहाव वाला नाला है। बरसात में ग्रामीण नाले के आसपास भी नहीं फटकते। वहीं 50 मीटर चौड़े नाले को 6 मीटर में समेटने का खेल अब सामने आ गया है। 

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जनाक्रोश और प्रशासन की चुप्पी

बरसात में किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, लेकिन अफसरों को न तो अपनी गलती का अफसोस है और न ही किसी उच्च अधिकारी का डर। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अधिकारी अब जनता को अपना नौकर समझने लगे हैं। इधर मामले की जानकारी होने के बाद भी प्रशासन के जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।