- 120 से ज्यादा प्रतिभागी हुए शामिल
जीपीएम। मरवाही वनमंडल के गौरेला रेंज में पहली बार ‘मैकल की उड़ान’ कार्यक्रम के तहत चार दिवसीय बटरफ्लाई सर्वे किया गया। इसका उद्देश्य तितलियों की विलुप्त होती प्रजातियों की पहचान, उनके संरक्षण की जरूरत और पर्यावरणीय संतुलन पर उनके प्रभाव को समझना था। सर्वे के दौरान कुल 60 तरह की तितलियां दिखाई दीं, जिन्हें प्रतिभागियों और वनकर्मियों ने कैमरे में कैद किया।
अनेक राज्यों से पहुंचे प्रतिभागी
इस पूरे कार्यक्रम की ऑनलाइन घोषणा की गई थी ताकि तितली प्रेमी भी दूर-दराज से जुड़ सकें। चारों दिन अलग-अलग इलाकों में पांच-पांच किलोमीटर लंबा ट्रेल तय किया गया, जहां रोज पैदल सर्वे कर तितलियों का अध्ययन किया गया। अमरकंटक के उस हिस्से को खोज के लिए चुना गया जो गौरेला रेंज के अंतर्गत आता है और घने जंगल व पहाड़ी इलाकों से घिरा है।

इस सर्वे में 120 से अधिक अभ्यर्थियों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागी सिर्फ मरवाही या बिलासपुर और छत्तीसगढ़ से नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी पहुंचे थे। स्टूडेंट्स से एक हजार और नॉन-स्टूडेंट्स से दो हजार रुपये शुल्क लिया गया, जिसे कार्यक्रम की व्यवस्था और फील्ड सपोर्ट में खर्च किया गया।
सर्वे के दौरान तितलियों की प्रजाति, संख्या, प्रवास स्थल, प्रजनन संबंधी जानकारी और उनके अनुकूल वन्य ढांचे का डेटा जुटाया गया। इसका समापन अमरकंटक में हुआ, जहां प्रतिभागियों ने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम ने युवाओं, शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरित किया।




