टीआरपी डेस्क। Negligence in Syrup Manufacturing : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप पीने के बाद 18 बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जांच में सामने आया है कि बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक खतरनाक रसायन की मौजूदगी के कारण हुई, जो किडनी फेलियर समेत अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है।

तमिलनाडु स्थित श्री सन फार्मास्युटिकल्स नामक कंपनी की फैक्ट्री पर आधारित 26 पन्नों की सरकारी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें 350 से अधिक नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है। इनमें से 39 क्रिटिकल और 325 मेजर कमियां दर्ज की गईं है।

DEG जानलेवा रसायन

रिपोर्ट के मुताबिक सिरप में 48.6% तक DEG पाया गया जो अत्यधिक विषैला औद्योगिक रसायन है और आमतौर पर ब्रेक फ्लूइड, पेंट और प्लास्टिक में इस्तेमाल होता है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी इंसानी शरीर के लिए घातक होती है।

  • DEG की जगह आमतौर पर प्रोपलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल होना चाहिए, जो अपेक्षाकृत सुरक्षित है।
  • फैक्ट्री ने बिना बिल के 50 kg प्रोपलीन ग्लाइकॉल भी मौजूद था, जो अवैध है।

खुले में की गई थी सिरप की सैंपलिंग

निरीक्षण में पाया गया कि कच्चा माल बिना परीक्षण के इस्तेमाल किया गया। सैंपलिंग खुले वातावरण में की गई, जिससे सिरप के दूषित होने की संभावना और बढ़ गई।

See also  21 साल का लड़का नहीं कर सकता शादी, लेकिन लिव-इन की सहमति: पंजाब हाईकोर्ट

कई राज्यों ने लगाया कंपनी पर प्रतिबंध

  • तमिलनाडु सरकार ने 1 अक्टूबर से कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया और बाजार से सभी स्टॉक हटाने का आदेश दिया है।
  • फैक्ट्री में उत्पादन अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
  • मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में 3 अधिकारियों को निलंबित किया, ड्रग कंट्रोलर को हटाया और डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने यह सिरप मरीजों को प्रिस्क्राइब की थी।
  • मृतक बच्चों के परिजनों को ₹4 लाख मुआवजा देने की घोषणा की गई है।

पूरे देश में खतरे की घंटी

इस घटना के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केंद्र सरकार ने 6 राज्यों में 19 दवा निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण शुरू कर दिया है।

विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बुनियादी दवा निर्माण नियमों का पालन नहीं किया गया, तो ऐसी त्रासदियां फिर से हो सकती हैं। यह घटना दवा विनियमन प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है और इस सख्त निगरानी की मांग सामने आ रही है।

See also  क्रिकेट जगत को 'डकवर्थ-लुईस पद्धति' का नियम बताने वाले टोनी लुईस का निधन

श्री सन फार्मास्युटिकल्स में नियमों के उल्लंघन के प्रमुख बिंदु

  1. स्वच्छता और हाइजीन का अभाव
  • गंदगी और अस्वच्छ माहौल में किया जा रहा था सिरप का निर्माण।
  • गंदे और अस्वच्छ हालत में पाए गए पानी के टैंक।
  • उत्पादन क्षेत्रों में नहीं था एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम।
  • मक्खी पकड़ने वाले उपकरण (फ्लाई कैचर्स) और एयर कर्टेन्स गायब थे।
  • चूहों और कीटों को रोकने का नहीं था कोई प्रबंध।

2. उपकरणों में पाई गई खामियां

  • फैक्ट्री में उपयोग किए जा रहे थे जंग लगे और क्षतिग्रस्त उपकरण।
  • एयर हैंडलिंग यूनिट (AHU) जैसी बुनियादी व्यवस्था मौजूद नहीं।
  • लिक्विड फार्मूलेशन ट्रांसफर के लिए प्लास्टिक पाइप का उपयोग।
  • कहीं भी नहीं लगया गया था फिल्ट्रेशन सिस्टम।

3. स्टाफ और विशेषज्ञों की कमी

  • कुशल मैनपावर की भारी कमी पाई गई।
  • क्वालिटी एश्योरेंस और क्वालिटी कंट्रोल विभाग ही नहीं मिले।
  • कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग या SOP की जानकारी ही नहीं।

4. टेस्टिंग और सेफ्टी में लापरवाही

  • कच्चे माल को बिना परीक्षण या अनुमोदन के उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा था।
  • बैच रिलीज से पहले कोई जांच या एनालिसिस नहीं किया गया।
  • एनालिटिकल टेस्ट मेथड्स का कोई वैलिडेशन नहीं किया गया।
  • फार्माकोविजिलेंस सिस्टम (दुष्प्रभावों की निगरानी) पूरी तरह नदारद।

5. खतरनाक रसायनों का गलत इस्तेमाल

  • सिरप में 48.6% डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जो एक घातक विषैला रसायन है।
  • DEG का उपयोग ब्रेक फ्लूइड, पेंट और प्लास्टिक जैसे औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है।
  • 50 kg प्रोपलीन ग्लाइकॉल बिना किसी चालान या रिकॉर्ड के खरीदा गया।
  • DEG के कारण किडनी फेलियर और बच्चों की मौत की पुष्टि।
See also  लॉकडाउनः सरकार का राहत पैकेज का ऐलान, 80 करोड़ गरीबों को अगले 3 महीने तक 10 किलो चावल या गेहूं और 1 किलो दाल फ्री, गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर

6. सैंपलिंग और उत्पादन प्रक्रिया में लापरवाही

  • सैंपलिंग खुले वातावरण में की गई, जिससे उत्पाद का दूषित होना निश्चित था।
  • उत्पादन क्षेत्र का डिज़ाइन और लेआउट पाया गया दूषित, जिसके चलते बढ़ता था जोखिम।
  • केमिकल इफ्लुएंट्स (रसायनिक अपशिष्ट) सीधे सामान्य नालियों में छोड़े जा रहे थे।

7. नियामकीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन

  • बिना रजिस्ट्रेशन या अप्रूवल के हो रही थी केमिकल की खरीद।
  • प्रोडक्शन और टेस्टिंग से संबंधित कोई डॉक्यूमेंटेशन/रिकॉर्ड मेंटेनेंस नहीं पाया गया।
  • दवाओं के बाजार में आने से पहले कोई ट्रेसबिलिटी या बैच ट्रैकिंग नहीं की गई।

Negligence in Syrup Manufacturing : जांच रिपोर्ट में कुल 350 नियमों का उल्लंघन पाया गया जिनमें 39 क्रिटिकल (गंभीर) खामियां और 325 मेजर (महत्वपूर्ण) खामियां पाई गई है। ये सभी उल्लंघन मूलभूत दवा निर्माण मानकों के खिलाफ थे। यदि यह फैक्ट्री बुनियादी गुणवत्ता मानकों का पालन करती, तो 16 मासूमों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।