बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के अमला विकासखंड के छोटे से गांव टीकाबर्री में रहने वाले गोकुल यदुवंशी के घर इन दिनों मातम का माहौल है. गोकुल का 3 साल 8 माह का बेटा हर्ष यदुवंशी नागपुर मेडिकल कॉलेज के वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है. परिवार ने डॉक्टरों की लापरवाही और कोल्ड्रिफ सिरप को जिम्मेदार बताया है.

एक महीने पहले आया था बुखार

एक महीने पहले हर्ष को बुखार हुआ था. चितिंत परिजन बच्चे को लेकर परासिया के डॉक्टर प्रवीण सोनी के पहुंचे. जांच के बाद डॉक्टर ने कफ सिरप समेत अन्य दवाईयां पर्ची पर लिख दीं. परिजन ने बच्चे को दवाईयां दी. लेकिन, उन दवाओं से ठीक होने के बजाय हर्ष की हालत और खराब हो गई. ये देख परिजन उसे परसिया के दूसरे डॉक्टर अमित ठाकुर के पास लेकर गए. लेकिन, बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.

हर्ष का यूरिन बंद हुआ

अचानक से कुछ दिनों बाद हर्ष का यूरिन बंद हो गया. परिवार बैतूल के अस्पतालों के चक्कर काटते रहा. लेकिन, डॉक्टरों ने बच्चे की हालत को देखते हुए भर्ती नहीं लिया. मजबूर होकर परिजन हर्ष को नागपुर ले गए. वहां पहले कुछ प्राइवेट अस्पतालों में दिखाया गया. इलाज का खर्च इतना ज्यादा था कि मध्यमवर्गीय परिवार का बजट टूटने लगा. आखिरकार उसे नागपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि हर्ष की दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं. जिसके बाद से हर्ष वेंटिलेटर पर है और उसकी हालत बेहद गंभीर है. परिवार का कहना है कि दोनों डॉक्टरों ने बिना सोचे-समझे कोल्ड्रिफ सिरप दी, जिसकी वजह से उनकी मासूम जान खतरे में है. हर्ष के दादा देवा यदुवंशी फोन पर रोते हुए बताते हैं कि उनका पोता अब कोई मूवमेंट भी नहीं कर पा रहा है.

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