टीआरपी डेस्क। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के निदेशक राम कुमार काकानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटना पिछले पांच वर्षों में तीसरी बार हुई है जब किसी IIM प्रमुख ने बोर्ड के साथ मतभेद के चलते इस्तीफा दिया है। काकानी ने अपने त्यागपत्र में लिखा कि संस्थान में प्रचलित एचआर नीतियां और 2017 के आईआईएम अधिनियम की भावना के बीच असंगति उनके पेशेवर कार्यक्षेत्र को सीमित कर रही है। उन्होंने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया।

काकानी का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब आईआईएम कोलकाता के दो पूर्व निदेशकों, अंजू सेठ और उत्तम कुमार सरकार, ने भी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के साथ मतभेदों के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

अब देखना होगा कि संस्थान के अगले डायरेक्टर के रूप में किसे नियुक्त किया जाता है और नेतृत्व परिवर्तन से संस्थान की दिशा और कार्य प्रणाली में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।
आईआईएम रायपुर में विवाद के मुख्य बिंदु:
- आईआईएम अधिनियम और एचआर नीतियों में असंगति: काकानी ने अपने इस्तीफे में कहा कि इन दोनों के बीच असंगति के कारण उनके काम में बाधा आ रही थी।
- बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन के साथ मतभेद: काकानी ने अपने पत्र में बोर्ड के चेयरमैन के साथ मतभेदों का उल्लेख किया है, जो प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में उनके अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे थे।
- प्रशासनिक स्वायत्तता और संचालन की अखंडता पर प्रभाव: काकानी ने चिंता जताई कि इन मतभेदों के कारण संस्थान की स्वायत्तता और संचालन की अखंडता प्रभावित हो रही है।

निदेशक के रूप में काकानी की पृष्ठभूमि:
राम कुमार काकानी एक प्रसिद्ध शिक्षाविद हैं जिन्होंने आईआईएम कोझिकोड, एक्सएलआरआई जमशेदपुर और एलएलबीएसएनएए मसूरी में भी अध्यापन किया है। वर्तमान में, वह आरवी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में वीसी के रूप में कार्यरत हैं।
इस घटना का उच्च शिक्षा संस्थानों पर प्रभाव:
निदेशकों और बोर्ड अध्यक्षों के बीच विवाद: आईआईएम अधिनियम, 2017 के बाद से निदेशकों और बोर्ड अध्यक्षों के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।
स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर सवाल: इस घटना ने भारत के शीर्ष उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



