बिलासपुर। निविदा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के चलते आदिवासी विकास विभाग में छात्रावासों की मरम्मत के लिए जारी करीब 82.99 लाख रुपये के टेंडर रद्द कर दिए गए हैं। इसकी जांच में नियम उल्लंघन और पक्षपात की पुष्टि होने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पूरी निविदा प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है।
दरअसल चार अगस्त को आदिवासी विकास विभाग, बिलासपुर द्वारा कोटा, बिलासपुर, तखतपुर और मरवाही के 16 प्री-मैट्रिक छात्रावासों और आश्रमों के जीर्णोद्धार के लिए निविदा जारी की गई थी। इस संबंध में हुई एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विभाग के एक लिपिक ने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को ठेके दिलाने के लिए नियमों की अनदेखी की।
निविदा दस्तावेजों में थीं अनेक खामियां
जांच में यह सामने आया कि निविदा दस्तावेजों में कई तकनीकी खामियां थीं। श्रमिकों के बीमा और ईपीएफ से जुड़े जरूरी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था। कई ठेकेदारों ने केवल नाममात्र का पंजीयन कराया था, लेकिन श्रमिकों की बीमा की राशि जमा नहीं की गई थी। इसके बावजूद उनके आवेदन स्वीकार कर लिए गए, जो कि नियम विरुद्ध था।
स्वतंत्र जांच के लिए टीम गठित करने पर विचार
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले को गंभीर मानते हुए सहायक आयुक्त पीसी लहरे को तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने निविदा प्रक्रिया को निरस्त करते हुए नई निविदा की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच टीम गठित करने पर विचार कर रहा है।


