0 बाउंसर पहले भी भूविस्थापितों से कर चुके हैं दुर्व्यवहार

0 बैठक आयोजित कर ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

कोरबा-कुसमुण्डा। एसईसीएल की ठेका कंपनी में सुरक्षा के नाम पर रखे गए बाउंसरों द्वारा पिछली बार महिला भूविस्थापितों के साथ किए गए दुर्व्यवहार का मामला अभी शांत ही नहीं हुआ है और इस बीच बाउंसरों ने मिलकर एक युवक की पिटाई कर दी जो कंपनी में नौकरी से बिठाए जाने के बाद कम मांगने गया हुआ था। इतना ही नहीं इस पिटाई का वीडियो बनकर सोशल मीडिया में वायरल भी कर दिया गया। इस मामले को लेकर भूविस्थापित भड़के हुए हैं।

ड्राइवर की नौकरी के लिए साल भर से चक्कर काट रहा था युवक

कुसमुंडा क्षेत्र के चंद्रनगर के भूविस्थापित किसान समीर पटेल के साथ यह वाकया हुआ है। जानकारी के अनुसार, नीलकंठ कंपनी में उसे हेल्पर का कम दिया गया था, मगर वह ड्राइवर की नौकरी की मांग कर रहा था और इसके लिए पिछले एक साल से चक्कर काट रहे समीर पटेल को कंपनी के एचआर मुकेश सिंह ने ऑफिस बुलाया। किसान को उम्मीद थी कि इस बार बात बन जाएगी, लेकिन उल्टा उसके साथ बदसलूकी हो गई।

इस वाकए के वीडियो में नजर आ रहा रहा है कि एचआर मुकेश सिंह ने महिला बाउंसरों से समीर पटेल की पिटाई करवा दी। घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भूविस्थापितों को रोजगार देने का वादा खुद कंपनी ने किया था, तो अब ऐसे व्यवहार का क्या मतलब?

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स्थानीय को नौकरी में प्राथमिकता

चूंकि एसईसीएल ने अपने अधिकांश कार्य निजी कंपनियों को दे रखे हैं, इसलिए इन कंपनियों में काम पर रखे जाने के लिए भूविस्थापितों को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है, मगर चंद दलालनुमा स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को लोकल बताकर काम पर रखवा दिया है, ऐसे में मूल प्रभावित काम के लिए भटक रहे हैं। इन्हीं में शामिल समीर पटेल अपनी योग्यता के अनुसार काम पाने के लिए कंपनी के चक्कर काट रहा था, मगर कंपनी के अफसर ने उसकी बाउंसरों से पिटाई करवा दी।

इंडियन आर्मी और कमांडो लिखा है टी शर्ट पर

वीडियो में समीर पटेल को खींचते हुए उसकी पिटाई कर रही महिला बाउंसरों ने जो टी शर्ट पहन रखा है उसके पीछे एक में इंडियन आर्मी और दूसरे में कमांडो लिखा हुआ है। अब यह पुलिस को देखना होगा कि क्या इस तरह ड्यूटी के दौरान फोर्स की पहचान बताने वाले ऐसे ड्रेस पहनने चाहिए या नहीं।

बाउंसरों को रखने की प्रथा कैसे शुरू हुई..?


इन ठेका कंपनियों में, जिस पर कि एसईसीएल का पूर्ण रूप से अधिकार है, कुछ कम्पनियां दादागिरी पर उतर आई हैं। दीपका परियोजना प्रभावित मलगांव, सुआभोड़ी में जहां कंपनी कलिंगा के बाउंसरों ने परेशान किया तो दूसरी तरफ कुसमुंडा में आउटसोर्सिंग कंपनी नीलकंठ में भूविस्थपितों से लड़ने के लिए महिला बाउंसरों की तैनाती की गई है। इनका रवैया अनुचित बताया जा रहा है।

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ताजा घटनाक्रम में SECL कुसमुंडा प्रभावित क्षेत्र चंद्रनगर के भूविस्थापित किसान समीर पटेल को कंपनी ने काम से बिठा दिया था, दोबारा काम पर रखे जाने की मांग करते हुए जब वह कम्पनी के ऑफिस गया तो HR मुकेश सिंह ने महिला बाउंसरों से उसकी पिटाई करवा दीl इसके पहले भी महिला भूविस्थापितों के साथ इन बाउंसरों की अभद्रता और जोर जबरदस्ती करने का वीडियो वायरल हुआ था।


भूविस्थापितों से निपटने की अब ऐसी व्यवस्था..?

एसईसीएल के भूविस्थापितों से निपटने के लिए अब व्यवस्था बदल दी गई है। एसईसीएल कुसमुण्डा के अधीनस्थ ठेका कंपनी नीलकंठ प्रबंधन का रवैया इस  समस्या को बढ़ा रहा है। उसके तौर-तरीके से प्रभावितों में गहरी नाराजगी भी देखी जा रही है। एसईसीएल प्रबंधन से उनकी अपेक्षा है कि वह मुआवजा, नौकरी और बसाहट के मामलों का उचित निराकरण करे तथा अधीनस्थ ठेका कंपनियों में रोजगार के लिए ठोस और स्थाई समाधान करें। भूविस्थापितों को इन कंपनियों का चक्कर बार-बार न काटना पड़े।

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सवाल है कि क्या इन कम्पनियों को सरकारी कानून-व्यवस्था पर भरोसा नहीं है जो बाउंसरों के जरिए गुण्डागर्दी/अभद्रता कराने पर उतर आए हैं?

ग्रामीणों की हुई बैठक


कुसमुंडा में इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना की पहल पर ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि नीलकंठ कंपनी ने भू-विस्थापित किसानों को डराने और मारपीट करने के लिए महिला बाउंसरों की तैनाती की है। इन महिला बाउंसरों ने न केवल उनसे अभद्र व्यवहार किया बल्कि धक्का-मुक्की कर विरोध की आवाज़ दबाने का प्रयास भी किया।

इस कृत्य की सभी ने तीखी निंदा की और कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

किसान सभा ने की है जांच की मांग

पूर्व में बाउंसरों द्वारा भूविस्थापितों के साथ किए गए दुर्व्यवहार के बाद छत्तीसगढ़ किसान सभा ने मामले की लिखित शिकायत SECL के जीएम से करते हुए कार्रवाई की मांग की, साथ ही यह भी कहा कि कंपनी ने किन प्रावधानों के तहत इस तरह काम पर बाउंसरों को रखा है इसकी जांच की जाए।

बहरहाल नौकरी एवं मुआवजे के लिए परेशान SECL के भूविस्थापित बाउंसरों के रवैए को लेकर काफी गुस्से में हैं। देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन, पुलिस और SECL प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं।