रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो, नीति पारदर्शी हो और सिस्टम में नवाचार हो, तो किसी भी योजना को मिशन की तरह सफल बनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में राज्य ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन को बदलने वाली एक व्यापक सामाजिक पहल की तस्वीर है।

7.17 लाख से अधिक आवास पूरे

कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ को PMAY-G के तहत 18.12 लाख आवासों की स्वीकृति मिली थी, जिनमें से 22 महीनों में 7.17 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। 2016 से 2025 की अवधि में स्वीकृत 16.5 लाख आवासों में से 78 प्रतिशत निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस रफ्तार के साथ राज्य ने औसतन प्रतिदिन सबसे अधिक आवास पूर्णता दर हासिल करते हुए देश में टॉप रैंक प्राप्त किया है।

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पारदर्शिता और नवाचार बने छत्तीसगढ़ की ताकत

राज्य सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन में सुशासन और तकनीकी नवाचार को प्रमुखता दी। हेल्पलाइन, GIS आधारित पोर्टल, और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम ने योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाया। राज्य में कार्यरत 5000 से अधिक आवास मित्रों और रोजगार सहायकों ने न सिर्फ निर्माण की रफ्तार बढ़ाई, बल्कि ग्रामीणों को सरकारी प्रक्रिया से जोड़ा और जागरूक किया।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग से जलसंकट का समाधान

राज्य सरकार ने आवास निर्माण के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी है। ‘मोर गाँव, मोर पानी’ अभियान के तहत 1.5 लाख से अधिक आवासों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। महज 3000 रुपये से कम लागत में, यह प्रणाली न सिर्फ जल संकट को दूर कर रही है, बल्कि ग्रामीणों को दीर्घकालीन लाभ भी दे रही है।

रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर

छत्तीसगढ़ सरकार ने PMAY-G को सिर्फ एक आवास योजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा। 3000 से अधिक राजमिस्त्रियों को R-SETI के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। 8000 से अधिक लाभार्थियों को निर्माण सामग्री और केंद्रिंग प्लेट की आपूर्ति से स्वरोजगार के अवसर मिले और कई परिवार लाखपति बनने की ओर अग्रसर हुए। CLF के ज़रिए 70 करोड़ रुपये से अधिक का सरल ऋण भी वितरित किया गया।

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किश्त भुगतान से लेकर निगरानी तक

छत्तीसगढ़ में 4500 से अधिक ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से लाभार्थियों को किश्तों का भुगतान आसान बनाया गया है। इसके साथ ही, राज्य सरकार की डिजिटल निगरानी प्रणाली से अब प्रत्येक आवास की प्रगति को ट्रैक किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश शून्य हो गई है।

छत्तीसगढ़ बनेगा मॉडल स्टेट

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि केवल एक अवॉर्ड तक सीमित नहीं है। यह देशभर के लिए एक उदाहरण है कि किस तरह योजनाओं को जमीन पर उतारकर आम लोगों के जीवन को बदला जा सकता है। राज्य सरकार की रणनीति, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, और जनभागीदारी इसे अन्य राज्यों के लिए “बेस्ट प्रैक्टिस मॉडल” बना रही है।