रायगढ़। छत्तीसगढ़ के इस जिले में राशन कार्ड बनाने में काफी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। केंद्र के निर्देश पर जब जिले में संदिग्ध राशन कार्डों की जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पता चला कि जिले में धन्ना सेठों ने तो राशन कार्ड बनवाए ही हैं, साथ ही ढाई हजार से अधिक ऐसे लोग हैं जो दूसरे राज्यों में रहते हुए भी रायगढ़ जिले में फर्जी तरीके से राशन कार्ड का लाभ ले रहे थे। इतना ही नहीं, 5,330 से अधिक राशन कार्ड लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। ये आंकड़े सामने आने के बाद अब इन फर्जी कार्डों को डिलीट करने की तैयारी की जा रही है।

जांच में इस तरह की मिली गड़बड़ी

जिले में कुल 1 लाख 61 हजार राशन कार्डधारियों की सूची को संदिग्ध मानते हुए जांच के आदेश दिए गए थे। खाद्य विभाग ने जब जांच शुरू की, तो कई तरह की गड़बड़ियाँ सामने आईं:

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2,586 कार्डधारी ऐसे पाए गए जिन्होंने राशन कार्ड बनवाने के लिए दूसरे राज्यों का आधार कार्ड लगाया है।

229 राशन कार्डधारी विभिन्न कंपनियों के निदेशक हैं, यानी वे धन्ना सेठों की श्रेणी में आते हैं।

5,330 राशन कार्ड लंबे समय से निष्क्रिय हैं। इन कार्डधारियों ने लंबे समय से राशन नहीं लिया है और इनका कोई पता नहीं है।

2,367 लोग ऐसे हैं जिनकी वार्षिक आय 6 लाख से अधिक है, फिर भी वे पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं।

अब तक सिर्फ 12 हजार राशन कार्डों की ही जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में अभी तक केवल 12 हजार राशन कार्डों की ही जांच ही पूरी हो पाई है, जबकि लगभग 2 लाख 80 हजार राशन कार्डों की जांच अभी बाकी है। जानकारों का मानना है कि यदि सूक्ष्मता से जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ उजागर होंगी।

अधिकारियों ने इन आँकड़ों को स्वीकार किया है, हालांकि उनका कहना है कि रायगढ़ एक औद्योगिक जिला होने के कारण बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोगों ने पलायन भी किया है, जिससे राशन कार्ड संदिग्ध दिख रहे हैं।

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अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हर एक बिंदु पर जांच की जा रही है और गलत पाए जाने पर राशन कार्डों को डिलीट किया जाएगा।