टीआरपी डेस्क। पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और एडवोकेट पीताबास पांडा की हत्या के मामले में बीजू जनता दल (बीजेडी) के वरिष्ठ नेता और बरहामपुर के पूर्व विधायक बिक्रम पांडा समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी न केवल गंजम जिले बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल का कारण बनी है। गिरफ्तारी के बाद से ओडिशा की राजनीति गरमा की गई। वार-पलटवार का सिलसिला जारी है।
बरहामपुर के एसपी सरवण विवेक एम ने बताया कि हत्या के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, निजी दुश्मनी और आर्थिक नुकसान प्रमुख कारण रहे। पुलिस के अनुसार, हत्या की साजिश करीब 50 लाख रुपये में रची गई थी, जिसमें से 10 लाख रुपये शूटर को भुगतान किए गए। जांच के दौरान 80 से अधिक लोगों से पूछताछ और 500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।
पीताबास पांडा, जो ओडिशा स्टेट बार काउंसिल के सदस्य और सीनियर एडवोकेट थे, की 6 अक्टूबर को ब्रह्मनगर स्थित उनके आवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिया है और आरोपियों को बरहामपुर कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया।
इस कार्रवाई पर बीजेडी ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि पूर्व विधायक बिक्रम पांडा को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने कहा कि “असली अपराधियों को बचाने के लिए पुलिस निर्दोषों पर कार्रवाई कर रही है।”
वहीं बीजेपी ने बीजेडी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी अपराधियों को संरक्षण दे रही है। बीजेपी नेता और मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा, “बीजेडी अपराधियों को बचाकर ओडिशा के साथ अन्याय कर रही है। यह मामला कानून और राजनीति के टकराव का स्पष्ट उदाहरण है।”



