बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन, बिलासपुर की बॉक्सिंग रिंग में शराब पीकर बर्थडे पार्टी मनाने के मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर कोर्ट ने इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज किया और सुनवाई की।

मामले में कार्रवाई की मांगी जानकारी

चीफ जस्टिस और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि SECR जोन के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश अगली सुनवाई से पहले इस मामले पर शपथ पत्र के रूप में विस्तृत जवाब पेश करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में जांच के परिणाम और दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित या की गई कार्रवाई का विवरण होना अनिवार्य है।

खबर वायरल होने पर मची हलचल

मीडिया के जरिये यह मामला प्रकाश में आया। दरअसल SECR जोन के स्पोर्ट्स सेल प्रभारी, कोच और खिलाड़ी बॉक्सिंग रिंग में बैठकर बर्थडे पार्टी मना रहे थे। इस दौरान उन्होंने शराब पी और मौके पर नॉन-वेज भोजन किया। खेल अधिकारियों ने रिंग के मैट को टेबल की तरह इस्तेमाल किया, जिस पर गिलास, बीयर की बोतलें और स्नैक्स रखे गए। यह पार्टी कई घंटों तक चली, जिससे खेल सुविधाओं का अनुचित और अवैध उपयोग हुआ।

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सुनवाई के दौरान महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने कोर्ट को बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जल्द ही एक रिपोर्ट पेश की जाएगी। अदालत ने महाप्रबंधक को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट में जांच के निष्कर्ष, दोषी अधिकारियों की पहचान और उनके खिलाफ की गई या प्रस्तावित कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल किया जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि रेलवे जैसी सरकारी संस्था में खेल सुविधाओं का प्रयोग हमेशा अनुशासन और नियमों के तहत होना चाहिए। यदि अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अदालत ने यह भी जोर दिया कि खेल और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि यह सार्वजनिक विश्वास को भी प्रभावित करता है। इस तरह की घटनाएं केवल नियम उल्लंघन का मामला नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों, कोच और खेल संस्थाओं की छवि को भी प्रभावित करती हैं। खेल और प्रशिक्षण के लिए बनाए गए सरकारी संसाधनों का अनुचित प्रयोग और शराब का सेवन गंभीर रूप से निंदनीय है।

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कोर्ट ने अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 2025 के लिए निर्धारित की है। सुनवाई में अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि जांच रिपोर्ट पूर्ण पारदर्शी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई योग्य हो। इससे न केवल रेलवे में अनुशासन स्थापित होगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को भी रोका जा सकेगा।