0 रमन सरकार के दौरान होती थी मंदिरों के धान की खरीदी
रायपुर। प्रदेश भर में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 500 मठ मंदिर है, जिनकी हजारों एकड़ कृषि भूमि है तथा मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था देवी देवताओं का भोग राग भी इसी कृषि उपज की आय से होता है, किंतु राज्य सरकार मठ मंदिरों की भूमि से उत्पन्न धान की खरीदी नहीं कर रही है, जबकि 10 वर्ष पूर्व डॉ रमन सिंह सरकार में धान खरीदी की जाती थी।
यह मुद्दा आम आदमी पार्टी ने उठाया है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश के किसानों के कृषि उत्पादन धान की खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ होनी है और किसानों के साथ ही मठ मंदिर के देवी देवता भी परेशान है। आम आदमी पार्टी कर्मचारी विंग के प्रदेश अध्यक्ष, विजय कुमार झा एवं परमानंद जांगड़े प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति विंग ने कहा है कि किसान समर्थक किसान चिंतक कहलाने वाली भूपेश बघेल सरकार में भी मठ मंदिरों द्वारा मांग करने पर मंदिरों के कृषि भूमि के धान को शासन द्वारा क्रय नहीं किया गया था। रायपुर राजधानी में ही श्री महामाया मंदिर सार्वजनिक न्यास, श्री दूधाधारी मंदिर सार्वजनिक न्यास, जैतु साव मठ, नागरी दास मंदिर जैसे बड़े-बड़े मंदिर हैं, जिनके सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि है। प्रदेश के अनेक मंदिरों के संस्थापक व संरक्षक स्वयं दोनों राजनीतिक पार्टी के नेता रहे हैं, फिर भी देवी देवताओं को आर्थिक क्षति होती रही है।
इस मुद्दे को उठाते हुए विजय झा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सनातन धर्म की रक्षा एवं गौ रक्षा की दिशा में पहल करते हुए 15 नवंबर से मठ मंदिरों के कृषि भूमि के धान को भी क्रय करने का आदेश जारी किया जावे।


