टीआरपी। Chhath utsav : प्रदेश के अनेक शहरों में निवासरत बिहार, झारखंड के मूल निवासी छठ महापर्व श्रद्धा उल्लास से मना रहे हैं। पर्व की शुरुआत नहाय खाए और खरना परंपरा के साथ हो चुकी है। सोमवार को नदी-तालाब के किनारे हजारों श्रद्धालु अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देने उमड़ेंगे। घर-घर में पूरी रात भजन, कीर्तन से भक्तिभाव छाएगा। 27 अक्टूबर को छठ महापर्व की शाम अर्घ्य देने के पश्चात राजधानी के महादेवघाट तट पर भक्ति गीतों का आयोजन किया जाएगा। इसमें मुंबई के कलाकार छठ गीतों की प्रस्तुति देंगे। साथ ही नृत्य का मनोरंजक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा।

महादेवघाट छठ महापर्व समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि छठ पर्व दुनिया का मात्र एक पर्व है, जिसमें डूबते सूर्य और उगते सूरज की पूजा की जाती है। छठ पर्व को षष्ठी पूजा एवं सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है। छठ पर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

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भगवान सूर्य और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है त्योहार

सत्येंद्र सिंह गौतम का कहना है कि छठ पूजा भगवान सूर्य और उनकी छठी मइया को समर्पित है। त्योहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर हैं। त्योहार में पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, प्रसाद, प्रार्थना और सूर्य देवता को अर्घ्य देना शामिल है।

लोक गायिका स्वाति मिश्रा की प्रस्तुति आज

अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका स्वाती मिश्रा (मुंबई) के द्वारा 27 अक्टूबर की शाम महादेव घाट पर छठ गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। लोकधारा के मशहूर कलाकार तिलक राजा साहू और केशरी साहू के द्वारा छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाएगी । सोनाली एवं तरुण चोपड़ा टीम, प्रयागराज के द्वारा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी जाएगी ।

28 को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर करेंगे व्रत का पारणा

28 अक्टूबर को सुबह ब्रम्ह मुहूर्त से पूर्व ही महिलाएं अपने परिजनों के साथ तालाब, नदी के किनारे पूजा अर्चना करके सूर्य के उदित होने का इंतजार करेंगी। सूर्योदय होते ही सूर्य की ओर मुख करके विविध फलों, सब्जियों और जल से अर्घ्य देंगी। सूर्योदय पर अर्घ्य देने के पश्चात घर लौटकर छठी मइया को अर्पित ठेठुआ का प्रसाद ग्रहण करके निर्जला व्रत का पारणा करेंगी। इसी के साथ चार दिवसीय छठ पर्व का समापन होगा।

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