टीआरपी। Amla Navami is on 31st : आंवला यूं तो औषधिय गुणों से भरपूर होता है और इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। इसके सेवन से विविध बीमारियों में लाभ होता है। इसके अलावा हिंदू धर्म में आंवला का धार्मिक महत्व भी है। ऐसी मान्यता है कि आंवला फल में भगवान विष्णु और शंकर का वास होता है। दोनों देवों की एक साथ पूजा करने के लिए आंवला नवमीं पर आंवला पेड़ की पूजा की जाती है।

तुलसी और बेल का गुण

भगवान विष्णु को भोग में तुलसी अर्पित की जाती है, इसी तरह भगवान शंकर को बेल पत्र अर्पित किया जाता है। इन दोनों पौधों के औषधिय गुण आंवला फल में होते हैं। इसलिए भगवान विष्णु और शंकर की पूजा करने के लिए आंवला फल को पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को एक दिन भगवान विष्णु और शंकर दोनों की पूजा एक साथ करने की इच्छा हुई , तब मां लक्ष्मी ने आंवला फल को विष्णु और शंकर का रूप मानकर पूजन किया था।

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31 को है आंवला नवमीं

हिंदू पंचांग के कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमीं तिथि के दिन आंवला नवमीं पर्व मनाया जाता है। इसे अक्षय नवमीं भी कहा जाता है। अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। इस दिन किया गया दान पुण्य हमेशा के लिए अक्षय हो जाता है। 31 अक्टूबर 2025 को महिलाएं आंवला पेड़ के नीचे पूजा करके पेड़ के नीचे ही भोजन ग्रहण करेंगी। साथ ही निरोगी रहने की प्रार्थना करेंगी। आंवला नवमीं को अलग-अलग जगहों पर अलग – अलग नामों से पुकारा जाता है। यह पर्व इच्छा नवमीं, कुष्मांड नवमीं, आरोग्य नवमीं के रूप में भी प्रसिद्ध है।

वृद्धि योग, रवि योग, शिववास योग का संयोग

कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 30 अक्टूबर को सुबह 10.06 बजे से 31 अक्टूबर को सुबह 10.03 बजे तक है। सूर्योदय पर पड़ने वाली तिथि का महत्व होने से आंवला नवमीं 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन मंगलकारी और दुर्लभ संयोगों का योग है। इस दिन वृद्धि योग, रवि योग और शिववास योग का संयोग बन रहा है। ऐसे शुभ संयोग में आंवला नवमीं पर भगवान शिव का वास रहेगा।

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माता लक्ष्मी ने शुरू की थी पूजा

कथा प्रसंगों के अनुसार माता लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करने निकलीं। उनकी इच्छा हुई कि वे एक साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें। भगवान विष्णु को तुलसी और शंकर को बेल पत्र प्रिय होने से मां लक्ष्मी ने दोनों पौधों के गुणों के समावेश वाले आंवला फल को विष्णु और शंकर मानकर पूजन किया। पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और भगवान शंकर प्रकट हुए। मां लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और शंकर को भोग लगाया। स्वयं भी भोजन किया। इसी मान्यता के चलते आंवला नवमीं के दिन आंवला पेड़ के नीचे भोजन करने की परंपरा शुरू हुई।

ऐसे करें पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • आंवला पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करें।
  • पूजन में आंवला फल, जल, रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप
  • पेड़ की जड़ में दूध और शुद्ध जल अर्पित करें।
  • आंवले के पेड़ को रोली-अक्षत का टीका लगाएं।
  • पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत (कलावा) या मौली बांधकर परिक्रमा करें।
  • आंवला नवमीं की कथा सुनें।
  • आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें ।
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