धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ ब्लॉक के ग्राम पुरुंगा में प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना को लेकर एक बार फिर आदिवासी अंचल में आक्रोश की लहर दिखाई दी। जहां पर अंबुजा सीमेंट लिमिटेड समूह द्वारा लगभग 869 हेक्टेयर क्षेत्र में भूमिगत कोयला खदान खोलने की प्रक्रिया के संबंध में प्रशासन द्वारा 11 अक्टूबर को जनसुनवाई आयोजित करने की घोषणा की गई है। जैसे ही इसकी जानकारी प्रभावित गांवों तक पहुंची, ग्रामीण संविधान और पेशा कानून 1996 का हवाला देते हुए विरोध के स्वर में एकजुट हो गए।
विरोध की इस कड़ी में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी पुरुष, महिलाएं और युवा हाथों में संविधान की प्रति लेकर मौन रैली के रूप में धरमजयगढ़ मुख्यालय पहुंचे। रैली में कांग्रेस विधायक लालजीत राठिया भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम सभा सर्वोच्च है, और बिना उसकी सहमति के किसी भी प्रकार की जनसुनवाई या परियोजना लागू करना संविधान के अनुच्छेद 243 तथा पेसा अधिनियम का खुला उल्लंघन है।
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने स्थानीय एसडीएम, वन मंडलाधिकारी एवं जनपद पंचायत धरमजयगढ़ को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की। उन्होंने ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव की प्रति भी प्रशासन को सौंपी, जिसमें सर्वसम्मति से इस परियोजना का विरोध दर्ज किया गया है।
वहीं ग्रामीण व क्षेत्रीय विधायक लालजीत राठिया ने स्पष्ट कहा कि यह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र (पांचवीं अनुसूची) के अंतर्गत आता है, जहां ग्राम सभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण, खनन या किसी औद्योगिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि पेसा कानून का पालन करते हुए ग्राम सभा की सहमति से ही आगे की कोई भी प्रक्रिया चलाई जाए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, परंतु अपने जल–जंगल–जमीन की रक्षा के लिए संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं।


