टीआरपी डेस्क। देशभर में बढ़ती आवारा पशुओं और कुत्तों की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने हाईवे, सड़कों और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी पर रोक लगाते हुए उन्हें तुरंत हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी यदि निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कहा कि आदेश तीन भागों में विभाजित है। पहला, एमिकस क्यूरी द्वारा दायर रिपोर्ट को आदेश का अभिन्न हिस्सा मानते हुए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को अगली सुनवाई से पहले व्यापक हलफनामा दाखिल करना होगा। हलफनामे में रिपोर्ट में दर्ज खामियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शामिल होना चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
दूसरे भाग में अदालत ने राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देशों की पुनः पुष्टि करते हुए सभी राज्यों के नोडल अधिकारियों को राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य मार्गों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाने का निर्देश दिया। सभी पशुओं को सुरक्षित रूप से हटाने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आठ सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
आवारा कुत्तों को लेकर तीसरे भाग में सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत क्षेत्रों, जिनमें जिला अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन और अन्य सरकारी परिसर शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर ऐसे संस्थानों की पहचान कर परिसर को बाड़ लगाकर सुरक्षित किया जाए ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके। यह प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करनी होगी।
स्थानीय निकायों को नियमित निरीक्षण करने, आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने और नसबंदी के बाद उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि कुत्तों को उसी स्थान पर वापस न छोड़ा जाए, जहां से उन्हें उठाया गया था, क्योंकि इससे निर्देशों का उद्देश्य विफल हो जाएगा।


