टीआरपी डेस्क। धार्मिक मान्यता के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण परिवार था, जिसमें पत्नी सुमंगली अत्यंत तपस्विनी और धार्मिक प्रवृत्ति की थी। परिवार में गरीबी होने के बावजूद वह हर गुरुवार भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की भक्तिपूर्वक पूजा करती थी।
एक दिन उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान विष्णु और लक्ष्मी उसके घर प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि अगहन मास के गुरुवार को यदि सच्चे मन से व्रत और पूजा की जाए, दान किया जाए और पीतल या पीले वस्त्र का उपयोग किया जाए, तो घर में स्थायी समृद्धि का वास होता है।
सुमंगली ने अगहन के सभी गुरुवारों का व्रत किया और उसके बाद उसके घर में धन-धान्य की वृद्धि हुई, परिवार खुशहाल हो गया।
तब से यह व्रत स्त्रियों द्वारा परिवार की समृद्धि हेतु किया जाता है।
अगहन गुरुवार की पूजा-विधि
सुबह की तैयारी
- प्रातः स्नान कर घर की स्वच्छता करें।
- पूजा स्थान पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु-लक्ष्मी की स्थापना करें।
- तांबे या पीतल के बर्तन में शुद्ध जल रखें।
- दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
पूजा सामग्री
- हल्दी, चावल, अक्षत
- पीला वस्त्र या पीली चुनरी
- तुलसी पत्र
- पीले फूल
- चना दाल और गुड़
- दीपक और कर्पूर
- पंचामृत
- मौसमी फल और ताजा धान (यदि उपलब्ध हो)
पूजा प्रक्रिया
- भगवान विष्णु और लक्ष्मी का ध्यान करते हुए जल अर्पित करें।
- हल्दी-चावल और पीले फूल चढ़ाएं।
- तुलसी पत्र से भगवान विष्णु का अभिषेक करें (घर में अभिषेक न हो सके तो केवल जल और अक्षत अर्पित करें)।
- अगहन गुरुवार की कथा का पाठ करें।
- आज के दिन भोजन में पीले पदार्थ (खीर, पूड़ी, चना दाल-भात, गुड़-चावल) का विशेष महत्व होता है।
- पूजा समाप्त होने पर घर के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
- व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को संध्या आरती करके व्रत खोलती हैं।
अगहन गुरुवार के नियम-विधान
- व्रत करने वाले व्यक्ति को शुद्ध आचरण और सात्त्विक भोजन का पालन करना चाहिए।
- पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है।
- इस दिन नमक रहित या सात्त्विक भोजन ग्रहण करना उत्तम माना जाता है।
- दान-पुण्य का विशेष महत्व है—चना दाल, गुड़, कपड़ा या अन्न दान कर सकते हैं।
- घर में कलह या अपशब्दों से दूर रहें और शांत वातावरण बनाए रखें।
- तुलसी पौधे की विशेष पूजा करें और दीपक जलाएं।
- प्रत्येक गुरुवार को गरीबों, बुजुर्गों या ब्राह्मणों को भोजन खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- शाम में घर की महिलाएं मिलकर समूह में कथा सुनती और आरती करती हैं।



