0 आरोप – अडानी ढुलाई पहले, यात्रियों की सुरक्षा बाद में

बिलासपुर। 4 नवंबर को हुई भीषण रेल दुर्घटना में दर्जनभर मौतों और कई घायलों को लेकर बिलासपुर में ज़िला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण/शहर) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। हजारों की भीड़ रामलीला मैदान से जीएम रेलवे ऑफिस की ओर कूच कर गई और देखते ही देखते पूरा प्रशासन दबाव में आ गया। भीड़ को रोकने के लिए आरपीएफ ने हल्का लाठीचार्ज किया, बहसबाज़ी हुई, गेट बंद हुए, सड़कें जाम हो गईं लेकिन कांग्रेसजन अड़ गए।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी “रेल मंत्री इस्तीफा दो… मृतकों को न्याय दो… एक ट्रैक पर कई गाड़ियां क्यों?” की नारेबाजी करते रहे। जब तक जीएम कार्यालय से कोई अधिकारी सामने नहीं आया, तब तक कांग्रेस ने पूरा क्षेत्र ठप कर दिया।

बिलासपुर के रामलीला मैदान (तोरवा) में सुबह 11 बजे से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। तिफरा, बिल्हा, सकरी, बेलतरा, सीपत, मस्तूरी सहित पूरे ज़िले से हजारों कार्यकर्ता आए। सभा के बाद जब भीड़ रैली बनकर जीएम रेलवे दफ्तर की ओर बढ़ी, तो वहां पहले से तगड़ा पुलिस बंदोबस्त था। गेट बंद, आरपीएफ तैनात, बैरिकेडिंग तैयार किये गए थे, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस और आरपीएफ जवान बैकफुट पर नज़र आए।

See also  एआई समिट में कांग्रेस के 'अभद्र' प्रदर्शन के खिलाफ रायपुर में बवाल, भाजपा महिला मोर्चा ने फूंका राहुल गांधी का पुतला

गेट पर धक्का-मुक्की बढ़ी तो आरपीएफ की ओर से हल्का लाठीचार्ज भी किया गया, जिसे कांग्रेस ने शांतिपूर्ण आंदोलन को भड़काने की कोशिश बताया।

कांग्रेस का सवाल— “अडानी की ढुलाई सुरक्षित, लेकिन यात्रियों की जान खतरे में क्यों?”

कांग्रेसजनों ने गेट पर चढ़कर नारेबाजी तेज़ कर दी। जब जीएम की ओर से कोई अधिकारी बातचीत के लिए नहीं आया, कांग्रेसजन वहीं सड़क पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया। इससे ट्रैफिक ठप हुआ और रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया।

प्रदर्शन के लगभग एक घंटे के चक्काजाम के बाद डीजीएम सुधीर कांत माथुर बाहर आए और सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों के बीच बैठकर उनका ज्ञापन लिया। उन्होंने भरोसा दिया कि “आपकी मांगें उच्च स्तर तक भेजी जाएंगी।”

इस आंदोलन में डीपी विप्र कॉलेज की छात्राएं भी शामिल हुईं, क्योंकि दुर्घटना में उसी कॉलेज की एक छात्रा की मौत हुई थी।

ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी इस मौके पर कहा कि “रेलवे तानाशाह बन चुका है, सुरक्षा कवच झूठ साबित हुआ” उधर विजय केशरवानी बोले कि रेलवे का रवैया तानाशाही है, सहयोगात्मक बिल्कुल नहीं। बिलासपुर ने रेलवे ज़ोन को सब कुछ दिया, लेकिन बदले में यात्रियों को सुविधाएँ नहीं मिलीं। 4 नवंबर की दुर्घटना ने रेलवे के सभी सुरक्षा दावे ध्वस्त कर दिए। अडानी की ढुलाई को प्राथमिकता देकर एक ही ट्रैक पर कई गाड़ियां चलाई जा रही हैं, यह यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है।

See also  Train Accident : ईएमयू ट्रेन पटरी से उतरी, गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त

इस प्रदर्शन के जरिये कांग्रेस ने ये मांग रखी

मृतकों को 1-1 करोड़ मुआवज़ा और नियमित नौकरी, गंभीर घायलों को 50-50 लाख, साधारण घायलों को 10-10 लाख मुआवज़ा दिया जाये।