बिलासपुर। जर्जर सड़कों, बिजली बिल में बढ़ोतरी, धान खरीदी की अव्यवस्था, रजिस्ट्री रोक और गरीबों के मकानों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। यहां प्रदर्शनकारियों को रोके जाने के दौरान जमकर हंगामा हुआ।

इस प्रदर्शन से पूर्व कांग्रेसजन पहले पहले पार्टी के भवन में एकत्र हुए, वहां से रैली की शक्ल में पैदल कलेक्टोरेट की ओर रवाना हुए। इन्हे रोकने के लिए नेहरू चौक से कलेक्टर कार्यालय तक भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेट्स लगा दिए गए थे। जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। भीड़ बढ़ने पर हालात कुछ देर के लिए बेकाबू होते दिखे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने वज्र वाहन का उपयोग कर सुरक्षा घेरा बनाते हुए प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने की कोशिश की।

इस दौरान दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई, जिससे मौके पर तनाव फैल गया। अफरा-तफरी के बीच पुलिस बल बढ़ाकर कलेक्टोरेट परिसर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई। ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी और शहर अध्यक्ष विजय पाण्डेय ने आरोप लगाया कि दो साल की भाजपा सरकार में जनता की हालत बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि सड़कों की स्थिति जर्जर है, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता को लूटा जा रहा है, धान खरीदी में अव्यवस्था सरकार की नाकामी है, ताकि कम से कम धान खरीदा जाए। रजिस्ट्री दरों में वृद्धि और पांच डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री बंद होने से आम आदमी का मकान बनाना सपना रह गया है। इसके साथ ही गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें बेघर किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान होने तक विरोध जारी रहेगा।

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इन मुद्दों पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने सभी मुद्दों के तत्काल समाधान की मांग रखी :

  1. जर्जर सड़कें और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर सवाल
    लगातार खराब होती सड़कों का हवाला।
    बरसात के बाद सड़कें फिर टूटने की समस्या।
    दुर्घटनाओं और धूलजनित बीमारियों में वृद्धि।
    स्मार्ट सिटी फंड से ऐसी सड़क बनना जिस क्षेत्र में एक भी घर नहीं, साथ ही वह सड़क निजी जमीन में जाकर समाप्त— कांग्रेस ने इसे “अव्यवहारिक योजना” बताया।
  2. कोयला खनन और जंगलों की कटाई— पर्यावरण बनाम उद्योग पर सवाल
    हसदेव अरण्य और तमनार में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई का मुद्दा।
    कांग्रेस का दावा— कोयला उद्योग से छत्तीसगढ़ के लोगों को फायदा नहीं, उल्टा प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान।
    किसानों से धान लगाने पर पानी की खपत का तर्क देकर रोक, जबकि उद्योगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध— इस “दोहरी नीति” पर सवाल।
  3. बिजली बिलों की मार और स्मार्ट मीटर विवाद
    कांग्रेस का आरोप— सरकार ने दो साल में पाँच बार बिजली दरें बढ़ाईं।
    कम बिजली खपत के बावजूद बिल हजारों में।
    स्मार्ट मीटर बिजली बंद होने पर भी चलते रहते हैं।
    जनता के बढ़ते आक्रोश का हवाला।
  4. धान खरीदी में अव्यवस्था— किसानों की बेचैनी
    कई खरीदी केंद्रों में प्रक्रिया शुरू नहीं होने का दावा।
    पंजीयन में गड़बड़ियाँ, किसान लगातार भटक रहे।
    बोरा उपलब्धता को लेकर स्थिति अस्पष्ट।
    कांग्रेस ने कहा— मौजूदा व्यवस्था से कई किसान धान बेच ही नहीं पाएंगे।
  5. रजिस्ट्री शुल्क वृद्धि और गरीबों की जमीन पर ‘बुलडोजर’ का आरोप
    पाँच डिसमिल की जमीन की रजिस्ट्री बंद करने का मुद्दा।
    इससे गरीबों को संपत्ति होने के बावजूद बिक्री या सामाजिक कार्यों के लिए ऋण लेने में दिक्कत।
    नई गाइडलाइन से रजिस्ट्री शुल्क में भारी वृद्धि— मध्यम वर्ग पर असर।
    गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाकर बेघर करने का आरोप—
    “महिलाएँ और मजदूर शहर के पास रहने से जो रोजगार पाते थे, वह भी छीना जा रहा है।”
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