रायपुर। सूचना आयोग में खाली पड़े पदों के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और भर्ती पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटाने के बावजूद सरकार ने अब तक भर्तियां नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट के बार-बार कड़े निर्देश और फटकार के बावजूद राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। इस बीच 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई होने जा रही है। ऐसे में क्या सरकार जल्द ही नई नियुक्तियां करने जा रही है, या फिर अभी और वक्त लगेगा, यह सवाल अब भी मुंह बाये खड़ा है।
सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ रिट याचिका
प्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस साल मार्च 2025 में राज्य सरकार ने राज्य सूचना आयुक्त के पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। 163 लोगों ने आवेदन किया। सर्च कमेटी ने शॉर्ट लिस्टिंग के लिए नया नियम बनाया कि केवल 25 साल या उससे अधिक अनुभव वाले उम्मीदवार ही इंटरव्यू के लिए पात्र होंगे। यह विज्ञापन में नहीं था, केवल इंटरव्यू के लिए चयन करते समय निर्धारित किया गया। इसके खिलाफ अंबिकापुर के अधिवक्ता डॉ. दिलेश्वर प्रसाद सोनी ने इस नियम को मनमाना बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 11 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अब डॉ. सोनी ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में रिट अपील दाखिल कर दी है। अपील में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अंजलि भारद्वाज मामले (2019) में स्पष्ट निर्देश है कि शॉर्टलिस्टिंग के मानदंड पहले से सार्वजनिक होने चाहिए, जिसकी अवहेलना की गई है।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मूल मामले (अंजलि भारद्वाज व अन्य बनाम भारत संघ) की 17 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कहा गया था कि कोर्ट की कार्यवाही खत्म हो चुकी है और 6 हफ्ते में नियुक्तियां कर दी जाएंगी, लेकिन अभी तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए अगली सुनवाई एक दिसंबर 2025 को तय की है। नियुक्तियों को लेकर क्या प्रगति हुई है, राज्य सरकार को इस बारे में जवाब देना है।
हजारों अपीलों में सुनवाई का इंतजार
राज्य में सूचना का अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सूचना आयोग का पूर्ण रूप से काम करना जरूरी है, लेकिन मुख्य आयुक्त व सदस्यों का पद खाली रहने से हजारों अपीलें लंबित पड़ी हैं। अब सभी की नजरें एक दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और हाईकोर्ट में दायर अपील पर टिकी हैं।


