रायपुर / बिलासपुर। पिछले दिनों राजिम के राजीव लोचन महाविद्यालय में जेम के जरिये करोड़ों की खरीदी में की गई गड़बड़ी के आरोप में प्राचार्य और 4 प्रोफेसर्स को निलंबित कर दिया गया था। इसी कड़ी में अब अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में करोड़ों की जेम खरीदी की अनियमितताओं की जांच होने जा रही है। उच्च शिक्षा संचालनालय ने इस मामले में गहन जांच के लिए एडिशनल डायरेक्टर केके तिवारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय दल को बिलासपुर भेजने का निर्णय लिया है।

दरअसल प्रदेश भर में उच्च शिक्षा विभाग के असधिन संचालित विश्व विद्यालय और महाविद्यालयों जेम पोर्टल से की गई खरीदी में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तक पहुंची थी, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई। सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अनियमितता पर कार्रवाई में कोई देरी नहीं होगी।

क्या है शिकायत..?

अटल विश्वविद्यालय प्रबंधन पर आरोप है कि उसने जेम पोर्टल से करोड़ों की खरीद एक ही स्वामित्व वाले कई फर्मों से कर ली। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन फर्मों की मालिकाना संरचना एक ही व्यक्ति से जुड़ी है और इन्हें जेम पर अलग-अलग पहचान देकर खरीद का फॉर्मेट तैयार किया गया। बताया यह भी जा रहा है कि निविदा प्रक्रिया में ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जो केवल संबंधित सप्लायरों के पास ही उपलब्ध थीं। इस पद्धति से जेम पोर्टल की मूल भावना को ही दरकिनार कर दिया गया।

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शिकायत में निम्न तथ्यों का उल्लेख है :

अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, बिलासपुर द्वारा दिनांक 15.04.25 को जेम पोर्टल के माध्यम से बिना निविदा किए L1 पद्धति से लगभग 1 करोड़ के ऊपर की खरीदी की गई है जिसे तीन फ़र्मो को 26 क्रय आदेश एक ही दिन में जारी किए गये है।

(1) सागर इंडस्ट्रीज, जांजगीर। (II) सिंघानिया ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज, जांजगीर। (|||) ओशन एंटरप्राइज़, जांजगीर।

इसी तरह 19.04.25 को भी 6 क्रय आदेश और 28.04.25 को भी कुछ कार्य आदेश जारी हुए है जो इन्हीं फ़र्मो को दिए गए है।

इसी कड़ी में 14.10.25 को वीरांगना रमोतीन गवर्नमेंट मॉडल कॉलेज, नारायणपुर द्वारा इन्ही फ़र्मो को एक ही दिन में 35 लाख के 22 अलग-अलग क्रय आदेश बिना निविदा के दे दिए गए है (L1 पद्धति में) ।

उधर 22.10.25 को गवर्नमेंट कॉलेज, महासमुंद द्वारा इन्ही फ़र्मो को एक ही दिन में 1 करोड़ मूल्य के 36 अलग-अलग क्रय आदेश बिना निविदा के दे दिए गए है।

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ऐसा ही उच्च शिक्षा विभाग में इन्ही फ़र्मो द्वारा अधिकारियों से मिलीभगत करके और विश्वविद्यालयों में इसी प्रकार की ख़रीदी की जा रही है। यह भ्रष्टाचार खरीदी विभाग के अधिकारियों द्वारा संबंधित फर्म से साठगांठ कर शासन को करोड़ो का चुना लगाया गया है, क्योंकि बाजार में इसकी वास्तविक कीमत 40 लाख रु से अधिक नहीं है।

शिकायत को लेकर सरकार गंभीर

मुख्य सचिव विकास शील ने साफ निर्देश दिए हैं कि खरीदी घोटाले में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई से कोई भी बच नहीं पाए। इससे पहले भी सरकार ने महासमुंद जिले के राजीव लोचन पीजी कॉलेज, राजिम में जेम खरीदी गड़बड़ी पकड़े जाने पर प्राचार्या सहित चार सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया था। अब अटल विवि भी सरकार के निशाने पर है।

हायर एजुकेशन विभाग की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जेम खरीदी में एक बड़ा खेल पूरे प्रदेश में लंबे समय से सक्रिय है। एक ही सप्लायर कई नामों से फर्म बनाता है, फिर विभागीय अधिकारियों से सेटिंग के जरिए ऐसी शर्तें डलवा लेता है जो अन्य किसी सप्लायर के पास नहीं होतीं। इसके बाद वही सप्लायर अपनी अलग-अलग फर्मों से तीन टेंडर भरता है और तकनीकी योग्यता में टिक कर L1 घोषित हो जाता है। इस बड़े खेल का सबसे मजबूत केस इस समय अटल विश्वविद्यालय के खिलाफ माना जा रहा है।

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सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तय है। विश्वविद्यालय प्रबंधन के जिन अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया को क्लियरेंस दिया, वे भी जांच के दायरे में होंगे। उच्च शिक्षा संचालनालय की टीम बिलासपुर में संबंधित दस्तावेजों और खरीदी की संपूर्ण प्रक्रिया की गहराई से जांच करेगी।

फिलहाल प्रदेश भर के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों की नजरें अटल विवि पर टिकी हैं। जेम खरीदी का यह मामला सिर्फ एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है—कई विभागों में इसी तरह की शिकायतें पहले भी उठ चुकी हैं। अगर अटल विश्वविद्यालय का मामला साबित होता है, तो यह प्रदेश में जेम पोर्टल पर होने वाली सबसे बड़ी खरीद अनियमितता मानी जाएगी।