टीआरपी डेस्क। बाजार में लगभग 20 हजार की कीमत में मिलने वाली रोटी मेकिंग मशीन को ट्राइबल विभाग ने जेम पोर्टल से लगभग 8 लाख रूपए में खरीदा। इस खरीदी की प्रदेश में जमकर चर्चा हुई और विभाग पर सवाल भी खड़े किए गए। जब इस मामले की जानकारी कृषि एवं आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम को लगी तो उन्होंने 18 सितंबर को एक आदेश जारी किया और प्रमुख सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को 7 दिवस के भीतर जांच कर वस्तुस्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए थे।

7 दिनों के भीतर मांगी गई जांच रिपोर्ट 7 सप्ताह में भी नहीं दी गई। हालांकि पिछले माह में यह जानकारी मिली कि जांच रिपोर्ट विभाग में पेश कर दी गई है। जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया है, इस बारे में जानकारी के लिए टीआरपी टीम ने प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने जानकारी नहीं दी।
इसके अलावा विभागीय पोर्टल से प्राप्त आयुक्त सारांश मित्तर के कार्यालय नंबर पर भी फ़ोन कॉल किया गया लेकिन विडंबना यह है कि नंबर ही अमान्य बताया गया। वहीं अपर संचालक संजय गौड़ और आर. एस भोई से भी संपर्क साधा गया लेकिन बात ही नहीं हो पाई।
ये है सवाल…
जानता के पैसे से हाई रेट में खरीदी गई रोटी मेकिंग मशीन की जानकारी दो महीने से अधिक समय पर भी सामने नहीं आई है। आखिर क्यों जानकारी देने से बचा जा रहा है ? किसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है ? कही इस मामले में अधिकारियों की संलिप्पता तो नहीं ?





