रायपुर। छत्तीसगढ़ में जेम पोर्टल के माध्यम से मक्का बीज खरीद को लेकर एकबार फिर से गंभीर अनियमितता सामने आई है। एक ही कंपनी से एक ही किस्म के बीज दो जिलों में लिए गए हैं लेकिन दोनों की कीमत अलग अलग है। हैरत की बात यह भी है कि जेम पोर्टल में उस कंपनी के अलावा भी कई कंपनियां हैं जो कम कीमतों पर बीज दे रही हैं लेकिन कृषि विभाग ने बीज आपूर्ती के लिए महंगा विकल्प चुना है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मक्का बीज की खरीदी हो रही है। इन बीजों को राष्ट्रीय बीज निगम किसानों को 199 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध करवा रहा है। बता दें इस साल 16 करोड़ रुपए के बीज की खरीदी की जानी है।

किसानों को होगा बीज का वितरण

जानकारों की मानें तो टेंडर की शर्तें भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय पत्र क्र. DO No. 22/CEO-GeM/2024 के अनुरूप नहीं है। साथ ही अन्य प्रतिभागियों को भाग लेने से प्रतिबंधित कर रही हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचने के लिये पूरा विभाग नियम विरुद्ध खरीदी में एक नेक्सस काम कर रहा है। यही वजह है कि विभाग द्वारा निविदा देखने के बाद भी कोई आपत्ति नहीं की गई।

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DNA टेस्टिंग की गई दरकिनार

जानकारों का कहना है कि बीज खरीदी में DNA टेस्टिंग महत्वपूर्ण है। दरअसल इससे पूर्व इंदिरा गांधी कृषि विश्वविध्यालय से बीज के DNA जांच रिपोर्ट प्राप्त होने उपरांत ही भुगतान किया जाता था। मगर Gem में निविदा के साथ एक माह पुरानी DNA रिपोर्ट की मांग की गई है। इससे आशंका है कि IGKVV की DNA रिपोर्ट के बगैर ही भुगतान किया जाएगा। टेंडर की एक शर्त में NABL लैब की रिपोर्ट को भी मान्य किया गया है। जबकि NABL लैब की रिपोर्ट को मान्य करने का कोई नियम नहीं है।

जिलों में कीमतों का अंतर

डीडीए जांजगीर ने 4,489 किलो मक्का बीज 1184 रुपये प्रति इकाई की दर से करीब 53.15 लाख रुपये में और डीडीए महासमुंद 3900 किलो बीज 1480 रुपये प्रति पैक की दर से 57.72 लाख रुपये में खरीदने का ऑर्डर दिया है।

दोनों जिलों में बीज की प्रजाति और कंपनी एक ही है, लेकिन दरों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। हैरानी की बात यह है कि इसी जेम पोर्टल पर इससे सस्ता बीज भी उपलब्ध है।

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शर्तों का खेल

जानकारों की मानें तो जेम पोर्टल इन दिनों सरकारी खरीदी में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है। एक ही कंपनी प्रदेश के अलग अलग जिलों में एक की किस्म के बीज अलग अलग दामों पर बेचती है। विभाग आंख बंद कर उसे खरीदता भी है। दरअसल कंपनी नियमों का हवाला देते हुए महंगे बीज बेचती है। ये नियम और शर्तें जानकर ही टेंडर में शामिल की जाती हैं।

पोर्टल पर उपलब्ध रेट: NSC सबसे सस्ता

E-Marketing Portal (GeM) पर Hybrid Maize DMRH-1308 के लिए कुल पांच कंपनियां सूचीबद्ध हैं। इनमें सरकारी National Seeds Corporation (NSC) सबसे कम कीमत पर बीज उपलब्ध करा रहा है।

GeM पर उपलब्ध कंपनियों और रेट की सूची

NSC DMRH-1308, 5 kg पैक 1050 रुपए

कर्णावती सीड्स- DMRH-1308, 4 kg – 1184 रुपए और 4000 रुपए

महालक्ष्मी क्रॉप साइंसेज – DMRH-1308, 4 kg – 1500 रुपए और 5200 रुपए

फार्म इन्फॉर्मेटिक्स – 4 kg – 1900 रुपए और 5000 रुपए

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अर्जुन बायो इंटरनेशनल – 4 kg – 2500 रुपए और HM-4, 4 kg – 5480 रुपए

स्पष्ट है कि NSC का बीज सबसे कम रेट पर उपलब्ध है, फिर भी सरकारी खरीद में निजी कंपनियों के महंगे विकल्प चुने जा रहे हैं।

सुलगते सवाल

  • पूरे प्रदेश में एक ही कंपनी से मक्का बीज की खरीद क्यों?
  • एक ही कंपनी से अलग जिलों में अलग-अलग दर पर खरीद की अनुमति कैसे?
  • जब NSC का वही बीज सस्ते में उपलब्ध है, तो निजी कंपनियों से महंगे दामों पर खरीद क्यों?
  • टेंडर में OEM must have unit in Chhattisgarh जैसी शर्त डालकर अन्य कंपनियों को बाहर करने की कोशिश क्यों की गई?
  • मक्का बीज की DNA जांच NABL से क्यों कराई गई?