टीआरपी डेस्क। दिल्ली नगर निगम के उपचुनाव में अशोक विहार वार्ड-65 का नतीजा अब सियासी और कानूनी बहस का मुद्दा बन गया है। आम आदमी पार्टी ने इस सीट के परिणाम को लेकर सवाल उठाते हुए रोहिणी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका पर 24 दिसंबर को सुनवाई होनी है।
AAP का आरोप है कि मतगणना के बाद चुनाव आयोग की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर पहले उसके उम्मीदवार को विजेता दिखाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद नतीजा बदल दिया गया और भाजपा उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया गया। पार्टी का कहना है कि इसी कथित गड़बड़ी को लेकर उसने अदालत में चुनौती दी है।
AAP के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि अशोक विहार वार्ड-65 में उनके उम्मीदवार की जीत की जानकारी चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपडेट भी कर दी गई थी। बाद में अचानक वह परिणाम हटा दिया गया और संशोधित नतीजे में AAP को पराजित दिखा दिया गया। भारद्वाज के मुताबिक, यही पूरा मामला संदेह के घेरे में है और इसी वजह से पार्टी कोर्ट पहुंची है।
उधर, भाजपा ने AAP के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनता के फैसले का अपमान बताया है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अशोक विहार वार्ड में भाजपा प्रत्याशी 405 वोटों से जीता है और इस स्पष्ट जनादेश को चुनौती देना दिखाता है कि AAP नेताओं को लोकतांत्रिक निर्णय पर भरोसा नहीं है।
सचदेवा ने तंज कसते हुए कहा कि हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव में नारायणा वार्ड में भाजपा सिर्फ 148 वोटों से हारी थी, लेकिन पार्टी ने बिना किसी विवाद के नतीजा स्वीकार किया। इसके उलट, AAP को 405 वोटों की हार भी स्वीकार नहीं हो रही और वह अदालत का सहारा ले रही है।
अब सबकी नजरें 24 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट के फैसले से यह साफ होगा कि अशोक विहार वार्ड-65 का यह चुनावी विवाद तकनीकी गलती था या फिर वास्तव में किसी गंभीर चूक की ओर इशारा करता है।



