रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर जेम पर जारी टेंडर विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। टीआरपी द्वारा ” जंबूरी के नाम पर खेल: GeM टेंडर बाद में, काम पहले ” के शीर्षक से खबर प्रकाशन के बाद शिक्षा विभाग ने टेंडर रद्द कर दिया है और बालोद के मालीघोरी मैदान में एक हफ्ते पहले जो तंबू लगाने का काम शुरू हो गया था उसे रोकते हुए टेंडर निरस्त कर दिया है।
हालांकि शिक्षा विभाग ने बालोद जिला शिक्षा अधिकारी को टेंडर निरस्त कर दिए जाने के बाद पुनः जेम के नियमों का पालन करते हुए पुनः प्रक्रिया आरंभ करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि 9 जनवरी 2026 को होने वाले इस आयोजन के लिए शिक्षा विभाग किस तरह टेंडर के नियमों का पालन करता है क्योंकि किसी भी टेंडर की प्रक्रिया के लिए 21 दिन का नियम पालन करना आवश्यक है। हालांकि संबंधित विभाग से आज्ञा लेकर यह प्रक्रिया 10 दिन के अंदर भी कराई जा सकती है।
बता दें कि 8 दिसंबर को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी 2026 आयोजन के लिए भूमि पूजन किया। इसके दो दिन बाद, 10 दिसंबर को जेम पोर्टल पर 5 करोड़ रुपये का टेंडर फ्लोट किया गया। नियमों के मुताबिक टेंडर में पारदर्शिता और समय-सीमा का पालन अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में यह नियम कागजों तक ही सीमित रहे।
इतना ही नहीं टेंडर की क्लोजिंग 20 दिसंबर को तय थी, लेकिन विभाग का कार्यालय बंद मिला और टेंडर से जुड़ा मोबाइल नंबर भी बंद था। इसके बावजूद मालीघोरी मैदान में टेंट का काम एक सप्ताह पहले ही शुरू हो चुका था। टीआरपी के पास इससे संबंधित सभी दस्तावेज मौजूद हैं, जिससे सवाल उठते हैं कि क्या कंपनी पहले से तय थी। बता दें कि बालोद में 9 से 14 जनवरी 2026 तक अंतरराष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन होना है।
टेंडर की शर्तें भी थीं विवादित
- केवल सेंट्रल और स्टेट पीएसयू का अनुभव मांगा गया, सरकारी विभागों को जानबूझकर बाहर रखा गया।
- प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यक्रम का अनुभव अनिवार्य किया गया, जबकि जंबूरी में उनका कोई कार्यक्रम नहीं था।
- टेक्निकल बिड में कम से कम 90 अंक पाने वाले ही फाइनेंशियल बिड में शामिल होंगे, जबकि विभागीय मानकों के अनुसार 51 अंक पर्याप्त थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी शर्तें अक्सर पहले से तय कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रखी जाती हैं। टीआरपी की खबर के प्रकाशन के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए टेंडर रद्द कर दिया। फिलहाल मालीघोरी मैदान में तंबू ताने जाने का काम स्थगित कर दिया गया है।
जवाबदेही किसकी?
हमें खेद है कि राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी 2026 कार्यक्रम शिक्षा विभाग के पैरलाइज्ड सिस्टम की भेंट चढ़ गया। टीआरपी का विरोध इस कार्यक्रम से नहीं है। इस आयोजन के माध्यम से देश-विदेश से बालोद आने वाले छात्र न सिर्फ आपसी संवाद करते, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का आदान-प्रदान भी होता।
लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा चहेतों को लाभ पहुंचाने की हड़बड़ी ने अब इस महत्वपूर्ण आयोजन पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है? इसकी जवाबदेही तो सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की बनती है।


